Shri Ganapati Mahotsav 3.0

Shri Hartalika Utsav 2025

Satsang & Meditation

Katha & Satsang: BPAS Sant Shri Gyanpriya Swami Ji

Guru Purnima 2025: 10.07.2025 Thursday

There will be a special Guru Purnima Puja and Aarti in our Mandir on 10.07.2025 Thursday from 18:30-19:00 Hrs.
Please try to spare some time in the evening, visit Mandir and take the blessings of Saints(Sant Gyaneshwar Ji and Sant Tukaram Ji) in our Vyaspeeth.
Your Mandir Family

चातुर्मासिक भगवद्कृपा श्रंखला 2025

भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में चातुर्मास के महत्त्व को बताया गया है. आइए हम लोग मिलकर इसको समझे और देखे कैसे परमात्मा हमारे हिन्दू मंदिर गीबल के माधयम से हम सभी पर अपनी अहेतुकी कृपा की वर्षा कर रहे है.
चातुर्मास हिंदू धर्म के विशेष 4 महीने की अवधि (आषाढ़ शुक्ल एकादशी या देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी या देवउठनी एकादशी तक) होती है, जिसे भगवान श्री विष्णु जी की योगनिद्रा का समय माना जाता है। यह अवधि व्रत, पूजा, त्याग और आत्मशुद्धि के लिए समर्पित होती है। इसमें बहुत से विशेष उत्सव आते है, जो हम अपने मंदिर में मनाएंगे.

  • श्रावण मास: शिव भक्ति, कांवड़ यात्रा।
  • भाद्रपद: श्री गणपति उत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी।
  • आश्विन: सम्पूर्ण भगवद्गीता पाठ, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, अखंड श्री रामचरितमानस पाठ, दशहरा ।
  • कार्तिक: दीपावली, लघु राम लीला 3.0, देवउठनी एकादशी,
    हमारे साधू संत वैसे तो वर्ष भर यात्रा करते हुए ज्ञान और भक्ति की अलख जगाते रहते है किंतु जैसे ही चातुर्मास शुरू होता है वह लोग जिस गाँव, कस्बे में होते है वही रुक जाते है और पूरे चातुर्मास तक उस जगह के लोगो पर अनंत कृपा करते है और चातुर्मास के पश्चात अपनी यात्रा तो आगे बढ़ाते है.
    हमारे गीबल मंदिर रुपी श्री रामजी के घर पर भगवान की इस वर्ष अति विशेष अति विशेष कृपा हुई है. हमारी भारत भूमि के दो प्रमुख और महान संत जिन्होंने शताब्दियों पहले श्री विष्णु के ज्ञान भक्ति और प्रेम की अनुपम धारा बहाई जिसमे स्नान कर आज भी भक्त तृप्त हो रहे है.
    संत श्री ज्ञानेश्वर महाराज जी और संत श्री तुकाराम महाराज जी, आळंदी महाराष्ट्र से पंढरपुर वारि में विराजमान हो हमारे मंदिर में पधारे है. हम सबने मिलकर पिछले रविवार को उनका स्वागत करा है. ये संत सम्पूर्ण चातुर्मास मंदिर की व्यासपीठ पर विराजमान हो भगवान आशुतोष को भी अति प्रिय श्री रामचरितमानस के अलौकिक आनंद के साक्षी बनेंगे और हमारे साथ इतने सारे उत्सव मनाएगें.
    जब विधाता ने हमारे घर पर ऐसे महान संतो को भेजा है तो हमारा कर्त्तव्य बहुत ही बढ़ जाता है. हम सबको प्रयास करना है कि जितना हो सकते हम संतो के सम्मुख उपस्थित हो स्वयं को उनकी सेवा में प्रस्तुत करते रहे.
    अपने घर से दूर हमको ऐसा पुण्य अवसर मिल रहा है, इसका लाभ उठाये और स्वयं अपने परिवार और समाज को कृतार्थ करे.
    आपका मंदिर परिवार
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