Shri Ganesh Chaturthi 3.0 Utsav Invitation 2025


श्री गणपति महोत्सव माहात्म्य

हमारे जितने भी रीती रिवाज़ और त्यौहार है उन सभी के पीछे कुछ न कुछ गूढ़ बाते होती है. अक्सर हमें उन रहस्यों का ज्ञान न होने से हम उनको कुरीति समझ लेते है. वास्तव में हमारे पूर्वज बड़े ज्ञानी थे जो एक गर्व का विषय है. आइये आने वाले श्री गणपति महोत्सव के विषय में कुछ जाने:

  • भगवान श्री गणपति माँ पार्वती और श्री महादेव जी के छोटे पुत्र है. जो ज्ञान, बुद्धि और बल में अग्रणी है. इनकी दो पत्निया रिद्धि और सिद्धि है और इनका वाहन मूषक है.
  • प्रयास करे कि आप भी उनके दर्शन कर उनसे सुख समृद्धि, रिद्धि और सिद्धि प्राप्त करे.
  • हमारे चक्र भेदन (हठ योग) के प्रथम चक्र, मूलाधार चक्र के अधिष्ठाता देवता गणेश जी ही है.
  • भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद (भादो) महीने के शुक्लपक्ष (बढ़ते चन्द्रमा की कलाओ) की चतुर्थी को केदारनाथ के निकट श्री गौरीकुण्ड नामक स्थान में हुआ था. इसे हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते है. उनके जन्म की कथा से आप लोग संभवतः अवगत होंगे.
  • अपनी सूझबूझ, बुद्धि और बल के कारण इनको अपने पिता और समस्त देवी देवताओ से ये आशीर्वाद प्राप्त है की ये देवो में सर्वप्रथम पूजित होंगे, इसीलिए हर पूजा में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा होती है.
  • इनको विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि यह अपने भक्तो के विघ्नो का हरण करते है.
  • अब प्रश्न यह है की जब जन्म का दिन एक है तो श्री गणपति उत्सव दस दिनों तक क्यों मनाया जाता है. इस विषय में हमको ऋषि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत के प्रथम सर्ग में जानकारी मिलती है. अलग अलग विद्वानों द्वारा बताई बातो में कुछ भिन्नता हो सकती है.
  • महाभारत के रचियता ऋषि वेद व्यास जी है पर उसको श्री गणपति जी ने लिखा है. गणपति जी इस शर्त पर इसको लिखने को तैयार हुए कि जब तक व्यास जी बिना रुके बोलते रहेंगे तभी तक गणेश की इसको लिखेंगे. इसको लिखने का कार्य भी गणेश जी के जन्मदिन को शुरू हुआ था और ख़त्म भाद्रपद शुक्लपक्ष चतुर्दशी को हुआ था. जो दस दिन है.
  • जब गणपति ने महाभारत लिखने का कार्य पूर्ण करा तो उनका शरीर बहुत गर्म हो गया और उनको शांत करने के लिए उनके ऊपर मिटटी का लेप लगाया और फिर सरस्वती नदी में स्नान के बाद वह मिटटी धुल गई.
  • दूसरी कथा यह कहती है कि दस दिनों में गणपति के ऊपर बहुत ही धूल और मिटटी जम गई थी जो चतुर्दशी को स्नान के बाद साफ़ करी गई.
  • इसके अलावा, गणपति के दस अवतार माने जाते है, दस दिशाए, दस अक्षर मंत्र ” ॐ गं गणपतये नमः”, गणपति के दस विशेष लक्षण (गुण) होते हैं, जो उनकी विशेषता को दर्शाते हैं.
  • यह ही दस दिनों का रहस्य है.
  • आज के युग में आदि गुरु शंकराचार्य जी ने गणपति पूजा को पुनर्जीवित करा.
  • कालांतर में मराठा काल में छत्रपति शिवजी महाराज ने शक्ति अर्जन के लिए गणपति स्थापना और विसर्जन को आगे बढ़ाया
  • बाद में हमारे नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने लोगो को जाग्रत कर इसे घर घर तक पहुंचाया
  • श्री गणपति कल मंगलवार 26.08.2025 को प्रातः 10:00-12:00 बजे के बीच हमारे मंदिर में आ रहे है दस दिनों तक रहेंगे.

Shri Ganapati Mahotsav 3.0 – Programm guidelines and information

  • Shri Ganapati Mahotsav 3.0 will begin on 26.08.2025 (Tuesday) at 10:00 Hours by doing Shri Ganapati Sthapna (स्थापना) in our Mandir / श्री गणपति महोत्सव 3.0 हमारे मंदिर में मंगलवार दिनांक 26.08.2025 को प्रातः 10:00 बजे श्री गणपति स्थापना के साथ आरम्भ होगा
  • Program will conclude on 06.09.2025 (Saturday) at around 13:00 Hours by doing Shri Ganapati Visarjan (विसर्जन) / समारोह का समापन शनिवार दिनांक 16.09.2024 को मध्यान्ह लगभग 13:00 बजे श्री गणपति विसर्जन के साथ सम्पन्न होगा
  • From Sthapna till Visarjan (Twelve Days), our mandir will be open round the clock / स्थापना से विसर्जन तक (दस दिनों) मंदिर लगातार चौबीसो घंटे खुला रहेगा
  • You all can come anytime for darshan except the rest/vishram (विश्राम) time of Shri Ganpati ji / भगवान गणपति के विश्राम को छोड़कर, आप लोग कभी भी मंदिर में उनके दर्शनों के लिए आ सकते है
  • On Sthapna day a Deepak/Jyoti will be lit and will remain active till Visarjan. All of you have this beautiful opportunity to bring Ghee from your home for Deepak / स्थापना के साथ ही श्री गणपति जी के आगे एक दीपक प्रज्वलित होगा जो विसर्जन तक जलता रहेगा. आप सभी के लिए यह एक अति सूंदर अवसर है कि आप अपने घर से देसी घी लाकर दीपक की ज्योत को निरंतर प्रज्वलित रहने में योगदान करे
  • Every day pooja, aarti and bhog will be performed thrice. Morning: 8:00 Hours, Afternoon: 12:00 Hours, Evening 19:00 Hours / प्रतिदिन तीन बार पूजा, भोग और आरती की जाएगी. प्रातः: 08:00 बजे, मध्यान 12:00 बजे और संध्या 19:00 बजे
  • All of you can bring and offer Durva Grass, Haldi, Akshat, Kumkum, Pushp(Flowers), Nariyal (Coconut), Jaggery and Fruits for Ganapati ji / आप सभी लोग दूर्वा (दूब), हल्दी, अक्षत, कुमकुम, पुष्प, नारियल, गुड़ और फल श्री गणपति जी को अर्पित कर सकते है
  • Since Mandir will be open for all ten days you can also help us by coming early or offer your service in critical timings. We have prepared a chart where you can add your name and become a part of service to Shri Ganapati ji / क्योकि मंदिर लगातार दस दिनों तक खुला रहेगा अतः आप लोग सुबह जल्दी आके, या अन्य माध्यमों से अपनी सेवा अर्पित कर सकते है. हमने एक चार्ट बनाया है जिसमे आप अपने आने का समय अंकित कर सकते है.
  • You can stay daytime, evenings, night and early morning’s and do home office from Mandir as well / आपका आगमन दिन में, संध्या को, रात्रि को और ब्रह्म मुहूर्त में हो सकता है और यदि आप चाहे तो HomeOffice भी मंदिर से कर सकते है
  • On 31.08.2025 (Sunday), we will be doing special Ganapati celebration after Shri Ramcharitmat Path and Shri Ganapati’s favourite Modak will be offered to him / दिनांक 31.08.2025 रविवार को हम लोग मिलकर विशेष गणपति उत्सव मनाएंगे. जिसमे हम लोग श्री रामचरितमानस पाठ के बाद उनका प्रिय मोदक भी उनको अर्पित करेंगे
  • If you are coming from a distance, let us know about your visit, your overnight stay arrangements can be made either in Mandir or in some of family member’s home nearby / यदि आप दूर से आ रहे है तो हमको सूचित करे, आपके सपरिवार रात्रि विश्राम की व्यस्था मंदिर में या आसपास रहने वाले परिवारों के यहाँ की जा सकती है
  • If you have small kids and have special requirements, do let us know. We do not promise but will try our level best to make you feel comfortable / यदि आपके साथ छोटे शिशु भी आ रहे है और उनकी कुछ विशेष आवश्यकताए है तो हमको अवगत कराए. हम पूरा प्रयास करेंगे की उनको पूरा कर सके
  • It’s a big celebration and a lot of helping hands are required. Come forward and be a part of us and make this special celebration memorable /यह एक बड़ा आयोजन है और इसके लिए बहुत से सहयोगी हाथो की आवश्यकता होगी. आप आगे आए और अपने सहयोग से इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दे
    Your Mandir Family

Shri Ganapati Mahotsav 3.0 Program

  • यह बहुत ही दुर्लभ होता है की किसी मंदिर में हम ईश्वर के साथ नितांत अकेले, कुछ समय व्यतीत कर सके या उनकी सेवा स्वयं अपने हाथो से कर सके.
  • सोचिये हम लोग कितने भाग्यशाली है जो श्री गणपति महोत्सव में ऐसा अवसर एक बार नहीं कई बार आ सकता है, जब सामने बैठे साक्षात् श्री गणपति से अपने ह्रदय के उद्गार व्यक्त कर सके.
  • कही ऐसा न हो की जीवन की इस आपाधापी में यह अवसर भी हाथ से निकल जाए.
  • जल्द से जल्द हमें सूचित करे की किस वक़्त आप श्री गणपति की सेवा अपने हाथो से करना चाहते है.
  • इस बात का हमें पूर्ण विश्वास है की आप जैसे समर्पित परिवार वालो के होते हुए श्री गणपति जी के पास सदैव कोई न कोई सेवा के लिए उपस्थित रहेगा.
    आपका मंदिर परिवार

श्री गणपति महोत्सव 3.0: श्री गणपति अथर्वशीर्षम स्पेशल

श्री रामचरितमानस में गोस्वामी जी लिखते है:

करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।

सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राउ॥

वह कहते है कि मै श्री रघुपति जी के चरित्र का गुणगान करना चाहता हूँ पर मेरी बुद्धि बहुत छोटी है और उनका चरित्र बहुत विशाल. ऐसे में मुझे कोई उपाय नहीं सूझ रहा है, मेरी बुद्धि और मन तो कंगाल है पर मनोरथ राजाओ जैसे है.

कुछ ऐसी ही स्थिति हमारे मन की भी है. न हमारे पास सामर्थ्य है और न ही संख्या। पर हमारा मन ये चाहता है कि इस बार श्री गणपति महोत्सव 3.0 में हम लोग मिलकर अपने *प्यारे श्री गणपति जी के श्री चरणों में एक लाख (100,001 ) श्री गणपति अथर्वशीर्षम अर्पित करे.* पिछली बार सबने मिलकर प्रयास करा था तो हम लोग 21000 श्री गणपति अथर्वशीर्षम उनको अर्पित कर पाए थे.

आप सभी हमारे मंदिर परिवार के बड़े उदार सदस्य है. आइये हम सब सबसे पहले कल शाम को मिलकर 21 बार श्री गणपति अथर्वशीर्षम से उनका अभिषेक करे और उनके ही चरणों में यह प्रार्थना करे कि उनका नाम लेने की शक्ति हमारे अंदर नहीं है, आप ही कृपा करे और इस विचार को पूरा करवाए.

दीन बंधु दाता भगवान, दिन दिन बढे आपकी शान

यह दीन भिखारी मांगे दान……..

आइए हम सब मिलकर श्री गणपति के आगे नतमस्तक हो जाए और उन्ही से यह प्रार्थन करे कि इस मनोरथ को पूर्ण करवाए। आगे उनकी मर्जी.

आपका मंदिर परिवार

Program: Day 1 (26.08.2025 Tuesday) Celebrations

  • आज 26.08.2025 मंगलवार को हमारे श्री गणपति महोत्सव 3.0 का प्रथम दिन है.
  • मंदिर प्रातः 10:00 बजे खुलेगा, सर्वप्रथम हमारे परिवार की बाल वाटिका के बच्चो द्वारा निर्मित श्री विनायक जी के विग्रह की मंदिर में स्थापना होगी
  • मध्यान 12:15 बजे भोग आरती के पश्चात दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक भगवान के विश्राम का समय रहेगा अतः इस समय दर्शन नहीं होंगे
  • सायः 17:30 बजे हम लोग मिलकर श्री गणपति जी को रामचरितमानस का मासपारायण सुनाएंगे
  • उसके पश्चात अपने घर आए श्री गणपति जी का 21 श्री गणपति अथर्वशीर्षम से अभिषेक करके आरती और भोग लगाएंगे।
  • प्रयास करे की अभिषेक में आप सही लोग सपरिवार सम्मलित हो
  • मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और आप लोग अपनी सुविधा अनुसार मंदिर आ सकते है
  • आज भाद्रपद माह की चतुर्थी है जो भगवान के जन्म का दिन है और गणेश चतुर्थी के नाम से भी जानी जाती है
  • उनके जन्म की कथाएँ पद्म पुराण, लिंग पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, वराह पुराण, शिव पुराण आदि अनेको पुराणों में आई है जो थोड़ा थोड़ा भिन्न है.
  • ऐसा कहा जाता है की उनका जन्म गौरीकुंड नामक स्थान पर (जो की केदारनाथ धाम के निकट है) हुआ था. माँ गौरी ने अपनी देह के उपटन से निर्मित कर उनके अंदर प्राण फूके थे और उनको अपनी सुरक्षा का आदेश दिया था.
  • क्योकि गणेश भगवान को तब तक अपने पिता का ज्ञान नहीं था इसलिए उन्होंने भगवान महादेव के अंदर जाने का रास्ता रोक लिया
  • बात आगे बढ़ी और दोनों के बीच में भीषण युद्ध हुआ जिसके अंत में भगवान शिव ने उनका सर धड़ से अलग दर दिया
  • बाद में माँ गौरी से पूरी बात जानने और माँ के हठ के बाद उन्होंने अपने गणो को आदेश दिया की जो भी सबसे प्रथम जीव मिले उसका धड़ ले आए
    गणो को सबसे पहले एक हाथी दिखा
  • अतः भगवान नीलकंठ ने हाथी का सर लगाकर गणेश भगवान को पुनः जीवन प्रदान करा और उनको अनेको अनेको आशीर्वाद प्रदान करा
  • आने वाले बारह दिनों तक हम आप लोगो से प्रतिदिन एक कथा साझा करेंगे और प्रयास करेंगे की हम लोग मिलकर भगवान गणपति के विषय में थोड़ा और ज्ञान प्राप्त कर सके
    आपका मंदिर परिवार

Program: Day 2 (27.08.2025 Wednesday) Celebrations

  • 26.08.2025 का दिन बड़ा ही आनंददायक रहा. भगवान विनायक की स्थापना से लेकर उनके रात्रि विश्राम तक लगभग 70 प्रेमी भक्तो ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करा.
  • श्री गणपति महोत्सव 3.0: श्री गणपति अथर्वशीर्षम स्पेशल के अंतर्गत कल हम लोग 700 श्री गणपति अथर्वशीर्षम उनके चरणों में अर्पित करे.
  • हमारे स्टुटगार्ट क्षेत्र में जितने हिन्दू रहते है यदि सब मात्र थोड़ा सहयोग दे तो एक लाख गणपति अथर्वशीर्षम की संख्या बहुत छोटी हो जाएगी.
  • अगर आप आज किसी वजह से आप श्री गणपति के दर्शनों को नहीं आ पाए तो प्रयास करे की आज आप उनके दर्शनों के लिए थोड़ा सा समय निकाले
  • आज 27.08.2025 भी मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग आरती और भजन होगा
  • प्रथम आरती प्रातः 8:00 बजे, दूसरी आरती मध्यान 12:00 बजे और फिर सायः 19:00 बजे तृतीय आरती और भोग लगेगा
    आप लोग अपनी सुविधा अनुसार मंदिर कभी भी आ सकते है
  • श्री गणपति का एक अति प्रिय जयघोष “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया“ तो आप सभी ने कभी न कभी सुना ही होगा. आइए आज इसके विषय में कुछ जानकारी प्राप्त करते है
  • बप्पा का अर्थ वैश्विक/सार्वभौमिक पिता होता है और भगवान गणेश को प्यार से बप्पा भी कहा जाता है
  • सन 1375 ई. में श्री वामन भट्ट और श्रीमती पार्वती बाई के घर एक पुत्र ने जन्म लिया जिनका नाम मोरया गोसावी रखा गया.
  • जो आगे चलके संत मोरया कहलाए। उनके जन्म के विषय में कुछ मतभेद है, कुछ लोगो का मत है कि वह कर्नाटक के एक ग्राम से महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गांव आए और कुछ का कहना है कि वह चिंचवाड़ गांव में ही जन्मे थे
  • पर यह बात सभी एकमत से स्वीकार करते है कि वह एक अनन्य गणपति भक्त थे
  • मोरया जी की श्री गणपति के प्रति अगाध श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का भाव रखते थे और वह हर गणेश चतुर्थी को अपने गाँव से 95 किलोमीटर दूर मयूरेश्वर मंदिर पूना में दर्शनों के लिए जाते थे
  • यह सिलसिला उनके बचपन से लेकर 117 वर्ष की आयु तक निर्बाध रूप से चलता रहा.
  • वृद्धावस्था के कारण उनके मन में वेदना और पीड़ा थी कि शायद वह अब उनके दर्शनों को नहीं जा पाएंगे.
  • ऐसा कैसे हो सकता है की भक्त तकलीफ में हो और भगवान को उसका भान न हो. एक दिन भगवान गणपति जी ने उनको दर्शन दिया और कहा की अब उनको उनके दर्शनों के लिए मयूरेश्वर मंदिर जाने की आवश्यकता नहीं है और वह उनको वही दर्शन देंगे.
  • उस दिन जब वह नदी में स्नान करके बाहर निकले तो उनके हाथ में वही विग्रह था जिसके उन्होंने स्वप्न में दर्शन करे थे.
  • भगवान की ऐसी कृपा से उनकी आँखो से अश्रु की धरा बह निकली और एक बार फिर भगवान ने दिखा दिया कि वह अपने भक्त के लिए क्या नहीं कर सकते है
  • उन्होंने चिंचवाड़ गांव में श्री गणपति को स्थापित करा और तभी से भक्त और भगवान का अंतर मिटता चला गया और गणपति बप्पा मोरया हो गया
  • भक्त जब उनको चरण स्पर्श करके मोरया बोलते तो वह श्री गणपति की कृपा को याद करते हुए मंगलमूर्ति कहते जो कालांतर में मंगलमूर्ति मोरया बन गया
  • ऐसा कहा जाता है की उन्होंने चिंचवाड़ गांव में जीवंत समाधी ली थी.
  • श्री गणपति का वह विग्रह और उनका समाधी स्थल आज भी चिंचवाड़ गांव में है.

आपका मंदिर परिवार

Program: Day 3 (28.08.2025 Thursday) Celebrations

  • कल बुधवार 27.08.2025 के दिन भी ईश्वर की बड़ी कृपा रही. दिन की शुरुआत श्री गणपति जी के सुन्दर श्रृंगार से हुई, जिसके बाद आरती हुई.
  • कल श्री गणपति जी के विश्राम में जाने तक लगभग 60 प्रेमी भक्तो ने उनका प्रेम, आशीर्वाद और प्रसाद प्राप्त करा.
  • कल हम लोगो ने मिलकर 710 श्री गणपति अथर्वशीर्षम श्री विनायक जी के श्री चरणों में अर्पित करे.
  • 710 अथर्वशीर्षम पाठ में 30 अथर्वशीर्षम तो हमारी बाल वाटिका एक एक प्यारे बच्चे शोभित के ही थे. जिसने कल ही पहले बार इसको बढ़ना सीखा और 30 अथर्वशीर्षम श्री गणपति के श्री चरणों में अर्पित करे.
  • जब एक 10 वर्ष का नन्हा बालक इतने समर्पण से गणपति के श्री चरणों में नतमस्तक हो सकता है तो हम बड़े क्यों नहीं.
  • प्रयास करे तो थोड़ी देर प्रतिदिन मंदिर आके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करे और थोड़े से अथर्वशीर्षम पाठ आप स्वयं उनके श्री चरणों में अर्पित करे.
  • आज 28.08.2025 Thursday को भी मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग आरती और भजन होगा
  • प्रयास करे कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान है प्रतिदिन थोड़े समय ही सही उनके दर्शनों का लाभ ले
  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती प्रातः 08:00 बजे, दूसरी आरती और भोग मध्यान 12:00 बजे और फिर सायः 19:00 बजे तृतीय आरती और भोग लगेगा
  • 18.00 से 19:00 बजे तक सभी लोग मिलकर सामूहिक श्री गणपति अथर्वशीर्षम का पाठ कर मंदिर को गुंजायमान कर देंगे.
  • दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक भगवान के विश्राम का समय रहेगा अतः इस समय दर्शन नहीं होंगे
  • आप लोग अपनी सुविधा अनुसार मंदिर कभी भी आ सकते है
  • वेदो के ज्ञान की गंगा को उपनिषदों ने आगे बढ़ाया पर फिर भी वह ज्ञान आम जनमानस के लिए अन्यन्त गूढ़ और कठिन था इसलिए श्री वेद व्यास जी ने उस ज्ञान को 18 पुराणों की कथाओ के माध्यम से सुलभ कराया.
  • आगे चलके उन पुराणों से 18 उप पुराण आए जिसने ईश्वरीय ज्ञान की गंगा को और विस्तार दिया.
  • वैसे तो भगवान गणपति के विषय में वेदो कीअनेको ऋचाओं और पुराणों की कथाओ में वर्णन मिलता है पर और विस्तृत कथाएँ हमको मुख्य रूप से दो उप पुराणों गणेश उप पुराण और मुद्गल उप पुराण में मिलती है.
  • वर्तमान के महाराष्ट्र क्षेत्र में श्री गणपित जी की विशेष कृपा रही है. वहाँ पर आठ ऐसे स्थान है जिनको स्वयंभू कहा जाता है. अर्थात ऐसे स्थान जहाँ पर श्री गणपति जी स्वयं प्रकट हुए थे और वहाँ पर श्री गणपति जी के मंदिर है
  • यह सभी मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इनकी यात्रा को श्री अष्टविनायक तीर्थ यात्रा कहा जाता है. आने वाले आठ दिनों में एक एक करके हम आपका इन अष्टविनायक मंदिरो से परिचय करवाएंगे और इनकी तीर्थ यात्रा पर ले चलेंगे।
  • इनमे प्रथम मंदिर है श्री मयूरेश्वर विनायक मंदिर जो पुणे के निकट है मोरेगांव में स्थित है
  • यह वही स्थान है जिसके दर्शनों को श्री मोरया जी 95 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर आते थे और इस मंदिर में उनकी अगाध श्रद्धा थे (उनकी कथा हमने आपको कल बताई थी)
  • यह भी मान्यता है कि प्रसिद्ध गणपति आरती “सुखकर्ता दुखहर्ता” की प्रेरणा श्री रामदास स्वामी जी को इसी मंदिर में मिली थी
  • प्राचीन काल में सिंधुरासुर नाम के एक राक्षस के अत्याचारों से रक्षा करने हेतु श्री गणपति जी ने मोर पर बैठकर उस राक्षस का वध करा इसीलिए श्री गणपति जी को यहाँ मयूरेश्वर नाम मिला
  • इस मंदिर में श्री मयूरेश्वर जी के साथ साथ माँ रिद्धि और सिद्धि के विग्रह भी है. साथ ही साथ द्वार पर श्री नंदी जी और मूषक जी भी है.
  • श्री गणपति जी की सूड़ यहाँ पर बाई तरफ है जो की शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली प्रदान करती है
    आपका मंदिर परिवार

Program: Day 4 (29.08.2025 Friday) Celebrations

  • कल बृहस्पतिवार 28.08.2025 के दिन भी ईश्वर की असीम कृपा बनी रही. सुबह सुबह स्नान करके भगवान के दरबार में आने वाले प्रेमियों को ये सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने अपने हाथो से भगवान का श्रृंगार करे.
  • थोड़ा मुश्किल होता है पर प्रयास करे कि आप भी प्रातः काल की स्वर्णिम बेला में श्री विनायक जी के समक्ष प्रस्तुत होकर उनके दिव्य श्रृंगार के साक्षी बने.
  • आज का दिन हमारी माताओ और बहनो के नाम रहा, जो आज पूरे दिन श्री गणपति जी की सेवा में उपस्थित रही हे और भोजन प्रसाद के साथ साथ पूजा पाठ भी करती रही. उन लोगो ने बड़े प्रेम भाव से श्री गणपति जी को पूरन पोली का भोग लगाया। ऐसे प्रेम एवं भक्तिभाव को बारम्बार प्रणाम.
  • श्री गणपति जी के विश्राम में जाने तक 40 प्रेमी भक्तो ने उनका प्रेम, आशीर्वाद और प्रसाद प्राप्त करा.
  • कल शायद आप सभी लोगो की बहुत व्यस्तता थी इसलिए काम लोग ही मंदिर में दर्शन को आ पाए और हम लोग मिलकर सिर्फ 400 श्री गणपति अथर्वश्रीशं का पथ कर पाए
  • आज 29.08.2025 Friday को भी मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग आरती और भजन होगा
  • प्रयास करे कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान है प्रतिदिन थोड़े समय ही सही उनके दर्शनों का लाभ ले. हमारे कुछ परिवार के लोग प्रतिदिन दर्शनों को आते है, जिसे देखना बड़ा ही सुखद होता है
  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती प्रातः 8:00 बजे, दूसरी आरती और भोग मध्यान 12:00 बजे और फिर सायः 19:00 बजे तृतीय आरती और भोग लगेगा।
  • 18.00 से 19:00 बजे तक सभी लोग मिलकर सामूहिक श्री गणपति अथर्वशीर्षम का पाठ कर मंदिर को गुंजायमान कर देंगे.
  • दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक भगवान के विश्राम का समय रहेगा अतः इस समय दर्शन नहीं होंगे
    अष्टविनायक
  • हम जब अष्टविनायक की बात करते है तो क्या आपने यह सोचा है कि यह आठ ही क्यों है? विद्वानों का यह मत है कि अष्ट विनायक हमारे आठ यौगिक चक्रो को व्यक्त करते है.
  • उनका हाथी का मस्तक बताता है की समझदार व्यक्ति की बुद्धि को स्थिर होना चाहिए।
  • बड़े कान और छोटा मुँह बताता है की हमें अधिक सुनना और कम बोलना चाहिए।
  • मूषक हमारे चंचल मन को दर्शाता है, जिसको स्थिर बुद्धि से ही काबू में किया जा सकता है.
  • बुद्धि शांत होने के लिए मन से चिंता का नाश होना आवश्यक है।
    श्री चिंतामणी गणपती (थेऊर)
  • श्री अष्टविनायक के द्वितीय गणपति थेऊर के श्री चिंतामणि है.
  • ऐसा कहा जाता है कि श्री ब्रह्मा जी ने अपने मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर श्री गणपति जी की आराधना करी थी.
  • इससे जुडी कथा हमको मुद्गल उप पुराण में भी मिलती है.
    कथा
  • कथा के अनुसार राजा अभिजीत और उनकी रानी गुणवती का पुत्र कण बड़ी दुष्ट प्रवृति का था. उसको संतो और ऋषि मुनियो को पीड़ा देने में बड़ा आनंद आता था. एक बार वह शिकार करते करते श्री कपिलामुनि के आश्रम में पंहुचा।
  • श्री कपिलामुनि के पास चिंतामणि हार था जो मांगने पर हर मनचाही वस्तु प्रस्तुत कर देता था. उन्होंने राजकुमार कण का आतिथ्य उसी चिंतामणि हार से प्राप्त सामग्री से करा.
  • राजकुमार कण ऋषि से चिंतामणि हार लेने का हठ करने लगा और मना करने पर बल पूर्वक छीन कर ले गया.
  • उसके माता पिता ने उसको वह हार ऋषि को वापस करने को कहा किन्तु वह न माना
  • कपिलमुनि ने श्री गणपति से विनय करी और श्री गणपति ने एक युद्ध में कण को परास्त कर मृत्यु प्रदान करी.
  • राजा अभिजीत ने क्षमा मांगी और कपिलामुनि को चिंतामणि हार वापस कर दिया, किन्तु कपिलामुनि ने वह हार स्वयं न रखकर उसको श्री गणपति जी को अर्पित कर दिया और उसके बाद से ही श्री गणपति जी को चिंतामणि नाम मिला
    आपका मंदिर परिवार

Program: Day 5-6-7 (30.08.2025, 31.08.2025 & 01.09.2025) Celebrations

  • पिछले दो दिन अत्यंत आनंदमय रहे।
  • सुबह स्नान करके हमारे प्रिय परिवार के सदस्यों को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने अपने हाथों से भगवान का श्रृंगार किया।
  • शनिवार को हमारे मंदिर में ईश्वर की विशेष कृपा रही। संत श्री माधवाचार्य जी के परंपरा से जुड़े श्री राघवेंद्र स्वामी मठ के सदस्य हमारे मंदिर में आए। उन्होंने मंदिर को अत्यंत सुंदर सजाया, भगवान का १०८ बार श्री राघवेंद्र स्तोत्र से षडोपचार विधि से अभिषेक किया, उत्कृष्ट श्रृंगार किया और फिर आरती हुई।
  • संध्या काल में विभिन्न रागों पर आधारित कर्नाटक संगीत पद्धति में अत्यंत मनोहर भजन और स्तुतियाँ प्रस्तुत की गईं।
  • रविवार को सुंदरकांड का पाठ हुआ और सभी लोगों ने मिलकर श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया, जो अत्यंत सुखद अनुभव था।

📿 दैनिक कार्यक्रम:

  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे
  • द्वितीय आरती एवं भोग: मध्यान्ह 12:00 बजे
  • तृतीय आरती एवं भोग: संध्याकाल 19:00 बजे
  • भगवान का विश्राम काल: दोपहर १:०० बजे से ४:०० बजे तक (इस दौरान दर्शन बंद रहते हैं)

💫 अष्टविनायक: तृतीय सिद्धिस्थान – श्री सिद्धिविनायक (सिद्धटेक)

  • एक कवि ने लिखा है: “हमारे इस संसार में आने के साथ ही जाने की तैयारी शुरू हो जाती है।” श्री गणपति जी के विसर्जन का समय निकट आ रहा है और उनके साथ बिताने के लिए अब थोड़ा ही समय शेष है।
  • बिना ईश्वर के चरणों में समर्पण के, जीवन के मार्ग की कठिनाइयों का अंत करना कठिन है। विशेष परिस्थितियों में हमें उनके आशीर्वाद और सिद्धियों की आवश्यकता होती है।
  • ऐसी ही सिद्धियों का एक प्रमुख स्थान है – तृतीय अष्टविनायक: सिद्धटेक के श्री सिद्धिविनायक मंदिर (अहमदनगर जिला, महाराष्ट्र)।

📖 पौराणिक कथा:

  • मुद्गल उपपुराण के अनुसार, भगवान विष्णु की योगनिद्रा से उत्पन्न दो राक्षस मधु और कैटभ ने ब्रह्मा जी की सृष्टि में बाधा डालनी शुरू की।
  • माँ दुर्गा के वरदान के कारण भगवान विष्णु भी उन्हें पराजित नहीं कर पा रहे थे।
  • भगवान शंकर के निर्देश पर, विष्णु जी ने श्री गणपति के आशीर्वाद से इन राक्षसों का वध किया।
  • जिस स्थान पर विष्णु जी को यह आशीर्वाद और अनेक सिद्धियाँ प्राप्त हुईं, वह श्री सिद्धिविनायक सिद्धटेक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

🔮 मंदिर की विशेषताएँ:

  • इस मंदिर में श्री गणपति जी की सूँड दाईं ओर है, जो इसे एक सिद्ध स्थान बनाती है।
  • यहाँ श्री गणपति को प्रसन्न करना कठिन माना जाता है, किंतु एक बार प्रसन्न होने पर वे भक्तों को अनेक सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।
  • इस मंदिर में श्री गणपति जी की गोद में रिद्धि और सिद्धि भी विराजमान हैं।

⚠️ ध्यान देने योग्य:

  • मुंबई का प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर इससे भिन्न है और अष्टविनायक में शामिल नहीं है।
  • श्री गणपति आप सभी को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करें! 🐘🙏

Program: Day 8 (02.09.2025, Tuesday) Celebrations

🙏 आइये हम सभी मिलकर प्रयास करें कि हमारे घर आए श्री गणपति को एक क्षण भी अकेला न छोड़े।

✨ कल (सोमवार) की झलकियाँ

  • दिन भर मंदिर का वातावरण आनंदमय और उत्साहवर्धक रहा।
  • प्रातःकाल की स्वर्णिम बेला में अनेक भक्तों ने श्री विनायक जी के दिव्य श्रृंगार के दर्शन किए।
  • कई भाई-बहनों ने दिनभर सेवा की और प्रसाद की तैयारियों में योगदान दिया।
  • मंदिर की दिव्य आलोकित आभा से हर आगंतुक मंत्रमुग्ध हुआ, मानो विवाह-उत्सव का घर हो।
  • माताएँ एवं बहनें अन्नपूर्णा बनकर भगवान और भक्तों के लिए भोजन तैयार करती रहीं।
  • विद्यार्थी भाइयों-बहनों का विशेष योगदान रहा, जिससे आयोजन सुचारु रूप से आगे बढ़ा।
  • सुबह से ही भक्तजन सेवा-भाव से उपस्थित रहे।
  • युवाओं के समर्पण और संस्कारों से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए।
  • रात्रि विश्राम तक लगभग 50 भक्तों ने दर्शन और सेवा का लाभ लिया।
  • अब तक लगभग 3200 से अधिक बार श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ हो चुका है।
  • कई भक्त चुपचाप आकर पाठ करके अपना नाम लिखकर चले गए, जिससे पूरे दिन श्री गणपति का नाम मंदिर में गूंजता रहा।
  • सामूहिक पाठ के समय वातावरण इतना आनंदमय होता है कि सभी बार-बार पाठ करने की इच्छा करते हैं।

🕉️ आरती एवं भोग का समय

  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 8:00 बजे
  • मध्याह्न आरती एवं भोग: 12:00 बजे
  • सायंकालीन आरती एवं भोग: 19:00 बजे

👉 जब तक श्री गणपति जी विराजमान हैं, प्रतिदिन थोड़े समय के लिए भी दर्शन का लाभ अवश्य लें।

  • आज सुबह तो लगा शायद गणपति में मंदिर खाली ही रहेगा पर एक विद्यार्थी बहन सुबह सुबह मंदिर आ गयी और अति स्फूर्ति और सेवा भाव से भगवान् का भोग और सबका नाश्ता बनाने लगी. धन्य है ऐसे बच्चो के माता पिता.

📖 कथा प्रसंग – रांजणगाँव महागणपति

  • त्रिपुरासुर, ऋषि गृत्समद का पुत्र था, जिसने श्री गणपति की आराधना कर तीन पुर (स्वर्ण, रजत, लौह) प्राप्त किए और अपराजेय शक्ति पाई।
  • अहंकारवश उसने तीनों लोकों पर साम्राज्य कर लिया।
  • देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उससे युद्ध किया, पर विजय न मिल सकी।
  • कारण यह था कि शिवजी ने पहले श्री गणपति का आशीर्वाद नहीं लिया था।
  • गणपति की आराधना कर आशीर्वाद पाकर शिवजी ने त्रिपुरासुर का वध किया।
  • यही स्थान आज रांजणगाँव है और यहाँ के गणपति “महागणपति” कहलाते हैं।
  • विशेषता: मंदिर ऐसा निर्मित है कि सूर्य की पहली किरण सीधे श्री गणपति के चरणों का स्पर्श करती है।

🌼 आपका मंदिर परिवार 🌼

श्री गणपति विसर्जन कार्यक्रम 2025 ⏰

  • यह सर्वविदित है कि समय का पहिया अपनी अनवरत गति से चलता रहता है। दुःख या प्रतीक्षा के समय तो ऐसा लगता है जैसे समय रुक गया हो, और सुख और आनंद के क्षण पलक झपकते ही बीत जाते हैं।
  • श्री गणपति विसर्जन को अब मात्र तीन दिन शेष हैं। पता ही नहीं चला कि यह समय इतनी जल्दी कैसे बीत गया। गणपति महोत्सव के दौरान हम में से कितनों का अधिकांश समय मंदिर में ही बड़े प्रेम और आनंद के साथ व्यतीत हुआ।
  • ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा पर्व या विवाह हो, और पूरा परिवार एक साथ आनंद मनाने के लिए एकत्रित हुआ हो.
  • यह सोचकर मन में हल्की कचोट और बेचैनी होती है कि आने वाले शनिवार को श्री गणपति जी का विसर्जन होने वाला है।
  • आइए हम सभी मिलकर यह प्रयास करें कि विसर्जन से पहले के शेष समय के हर क्षण का सदुपयोग करें और इसका पूर्ण आनंद उठाएँ।
  • प्रभु ऐसा करें कि इस आनंद और कृपा को स्मरण करते हुए समय जल्दी बीत जाए और अगले गणपति उत्सव में श्री गणपति पुनः हमारे मंदिर में आएँ और हमें उनकी सेवा कर सके।
  • लगातार खुले रहने और सेवा करने का अवसर तो नहीं किन्तु विभिन्न त्योहारों पर और प्रत्येक रविवार को हम सभी तो यह अवसर मिलता है जब हम अपने ईश्वर के चरणों में बैठकर उनकी सेवा कर सके.
  • प्रयास करे कि श्री गणपति विसर्जन से पहले हम सभी लोग कम से कम एक बार तो उनके दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करे.
    Visarjan Program
    Date: 06.09.2025 Saturday
    09:30-10:30 Hrs.: Abhishek, Puja, Bhog and Aarti
    10:30-12:30 Hrs.: Shri Ganapati Atharvashirsham Samuhik Path
    12:30-13:30 Hrs.: Bhog and Aarti
    13:30 Hrs Onwards: Visarjan procession in Palki till U-Bahn Stop

आपका मंदिर परिवार 🐘🙏

Program: Day 9 (03.09.2025 Wednesday) Celebrations

  • कल बमंगलवार के दिन का अनुभव और आनंद इतना अद्भुत था कि हम मूक हो गए। यह अनुभव हम सभी के हृदय में लंबे समय तक अंकित रहेगा।
  • सुबह की शुरुआत श्री गणपति जी के दर्शनों से हुई, जिसके बाद हमारे मंदिर परिवार के युवा सदस्यों ने पूर्ण भक्तिभाव से भगवान का श्रृंगार और अभिषेक किया।
  • हमारा प्रयास था कि कुछ लोग मिलकर श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें, पर मन में शंका थी कि क्या यह संभव हो पाएगा। किंतु गणपति तो गणपति हैं—उन्होंने इतने लोगों को भेज दिया कि कल ही 300 से अधिक पाठ उनके श्री चरणों में अर्पित किए गए। इतने लोगों के मुख से वैदिक ऋचाओं का स्वरबद्ध गुंजन देवीय अनुकंपा से कम नहीं था। लगता है न जाने कौन-कौन से देवता आप सबके रूप में आए थे!
  • कल के पाठ को लेकर हमारे मन में जितनी भी चिंताएँ थीं, वे सब राहुग्रस्त हो गईं और सब कुछ निर्बाध रूप से संपन्न हुआ।
  • यह कितनी सुंदर कृपा है कि दर्शनार्थ आने वाले प्रत्येक भक्त के मन में यह इच्छा जागृत हुई कि वह स्वयं श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करके भगवान को अर्पित करे।
  • अभी भी हमारे पास दो दिन शेष हैं। आप अपने परिवार के साथ आएँ और स्वयं अपना पाठ उन्हें अर्पित करें।

🐘 पाँचवें अष्टविनायक: श्री विघ्नहर्ता (ओझर):

  • हम जैसे बुद्धिहीन और नासमझ लोगों के प्रयासों को भी भगवान गणपति निर्विग्न बना रहे हैं।
  • शायद इसीलिए गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो कि हमारे पाँचवें अष्टविनायक गणपति हैं।
  • स्कन्द पुराण और मुद्गल उपपुराण में विघ्नहर्ता से जुड़ी कथा आती है।

📖 कथा:

  • राजा अभिनन्दन ने तीनों लोकों के स्वामी बनने की इच्छा से एक यज्ञ आरंभ किया। देवराज इंद्र इससे भयभीत हो गए और उन्होंने विघ्नासुर नामक एक असुर उत्पन्न किया।
  • विघ्नासुर ने केवल राजा अभिनन्दन के यज्ञ को नष्ट करने के बजाय सभी यज्ञों को विघ्नित करना शुरू कर दिया।
  • विघ्नासुर के अत्याचारों से पीड़ित ऋषि-मुनियों ने श्री गणपति से अपनी रक्षा की प्रार्थना की। श्री गणपति जी ने विघ्नासुर को परास्त किया और इस शर्त पर छोड़ा कि जहाँ कहीं भी श्री गणपति का पूजन होगा, वहाँ वह नहीं आएगा।
  • विघ्नासुर ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए श्री गणपति से अनुरोध किया कि भक्त श्री गणपति के नाम से पहले उसका नाम लें।
  • तभी से श्री गणपति को विघ्नहर भी कहा जाता है, और जिस स्थान पर विघ्नहर्ता निवास करने लगे, वह स्थान अष्टविनायक मंदिरों में से एक ओझर का विघ्नहर मंदिर कहलाने लगा।

📿 दर्शन और सेवा:

  • श्री गणपति जी के रात्रि विश्राम पर जाने तक लगभग 40 प्रेमी भक्तों ने उनके दर्शन का लाभ प्राप्त किया और किसी न किसी रूप में सेवा की।
  • आज 09.09.2025 बुधवार को भी मंदिर पूरे दिन खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग, आरती और भजन होगा।
  • प्रयास करें कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान हैं, प्रतिदिन थोड़ा समय निकालकर उनके दर्शन का लाभ लें। हमारे कुछ परिवार के लोग प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं, जिसे देखना अत्यंत सुखद होता है।

⏰ आज का कार्यक्रम:

  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती: सुबह 08:00 बजे
  • दूसरी आरती और भोग: दोपहर 12:00 बजे
  • तीसरी आरती और भोग: शाम 19:00 बजे

आपका मंदिर परिवार 🐘🙏

Program: Day 10 (04.09.2025 Thursday) Celebrations

  • कल बुधवार का दिन अत्यंत सुंदर और आनंददायक रहा।
  • सुबह की शुरुआत श्री गणपति जी के दिव्य दर्शनों से हुई, जिसके बाद हमारे मंदिर परिवार के एक प्रिय भाई ने पूर्ण भक्तिभाव से भगवान का श्रृंगार और अभिषेक किया।
  • एक तरफ तो इस बात की गर्व की अनुभूति हो रही है कि श्री गणपति जी हमारे मंदिर में पधारे, परंतु यह सोचकर हृदय विषाद से भर जाता है कि इस गणपति उत्सव के समापन में अब केवल 2 दिन शेष रह गए हैं।
  • यह अनेक भक्तों के तप और साधना का ही फल है कि यह उत्सव इतनी सफलतापूर्वक संपन्न हो पाया है।

🐘 छठे अष्टविनायक: श्री गिरिजात्मज (लेण्याद्री):

  • श्री गणपति को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए माँ पार्वती ने 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। जिस स्थान पर माँ पार्वती ने तपस्या की, वही स्थान लेण्याद्री का श्री गिरिजात्मज मंदिर है, जो हमारे अष्टविनायकों में छठे गणपति के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
  • ऐसा कहा जाता है कि श्री गणपति जी ने अपने जन्म के पश्चात 15 वर्षों तक लेण्याद्री पर निवास किया था।
  • यहाँ रहते हुए उन्होंने अनेक दैत्यों का वध किया था।

⛰️ मंदिर की विशेषताएँ:

  • यह एकमात्र अष्टविनायक मंदिर है जो एक पहाड़ पर स्थित है और एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है।
  • मंदिर की संरचना एक विशाल चट्टान को काटकर बनाई गई है। मंदिर तक पहुँचने के लिए 307 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
  • मंदिर में श्री गणपति जी की मूर्ति के बायीं ओर श्री हनुमान जी और दाहिनी ओर भगवान शिव विराजमान हैं।
  • गुफा मंदिर इतनी कुशलता से बनाया गया है कि जब तक सूर्य आकाश में रहता है, मंदिर के अंदर प्राकृतिक प्रकाश आता रहता है।
  • कुछ विद्वानों का मानना है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ व्यतीत किया था।

📿 दर्शन और सेवा:

  • श्री गणपति जी के रात्रि विश्राम पर जाने तक लगभग 40 प्रेमी भक्तों ने उनके दर्शन का लाभ प्राप्त किया और किसी न किसी रूप में सेवा की।
  • आज 04.09.2025 गुरुवार को भी मंदिर पूरे दिन खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग, आरती और भजन होगा।
  • प्रयास करें कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान हैं, प्रतिदिन थोड़ा समय निकालकर उनके दर्शन का लाभ अवश्य लें। हमारे कुछ परिवारजन प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं, जिसे देखना अत्यंत हर्षदायक होता है।

⏰ आज का कार्यक्रम:

  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती: सुबह 08:00 बजे
  • दूसरी आरती और भोग: दोपहर 12:00 बजे
  • तीसरी आरती और भोग: शाम 19:00 बजे

आपका मंदिर परिवार 🐘🙏

Program: Day 11 (05.09.2025 Friday) Celebrations

  • कल गुरुवार का दिन अत्यंत आनंददायक रहा। हमारे चार नन्हे-मुन्ने बच्चों ने श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया और अपनी स्फूर्ति एवं ऊर्जा से हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत बने।
  • आज सुबह श्री गणपति जी के दर्शनों के बाद हमारे मंदिर परिवार के दो परिवारों ने पूर्ण भक्तिभाव से भगवान का श्रृंगार और अभिषेक किया।
  • एक ओर तो इस बात की गर्वानुभूति हो रही है कि श्री गणपति जी हमारे मंदिर में पधारे, परंतु दूसरी ओर यह सोचकर हृदय व्यथित हो उठता है कि इस गणपति उत्सव के समापन में अब केवल कुछ घंटे ही शेष रह गए हैं।
  • यदि आप सभी कल मंदिर में आकर दोपहर १:०० बजे के विसर्जन से पूर्व थोड़ी देर श्री अथर्वशीर्ष का पाठ करेंगे, तो निश्चित रूप से हम कुछ और पाठ श्री विनायक जी के चरणों में अर्पित कर पाएंगे।
  • हमारे मंदिर परिवार के सदस्य अत्यंत उदार हैं और वे अवश्य ही कल मंदिर आकर पाठ पूर्ण करवाएंगे।

🌟 सातवें अष्टविनायक: श्री वरदविनायक (महड):

  • परमात्मा की प्रेरणा से हमारे मन में यह भाव उत्पन्न हुआ कि हम अपने मंदिर में श्री गणपति की स्थापना करें, और परिणाम आप सभी के सामने है।
  • जब भी हमारे मन में कोई इच्छा जागृत होती है, तो हम उसके पास जाना चाहते हैं जो हमारी इच्छा को समझे और पूरी करे। ऐसे में यदि हम किसी ऐसे देवता के पास जाएँ जो इच्छापूर्ति के लिए प्रसिद्ध हो और उसका नाम ही “वरद” हो, तो कहना ही क्या!
  • ऐसे ही उदार श्री वरदविनायक जी हमारे सातवें अष्टविनायक गणपति हैं, जो रायगढ़ जिले के महड में विराजमान हैं।
  • यहाँ नंदीदीप नामक दीपक सन १८९२ से निरंतर प्रज्वलित है।

📖 पौराणिक कथा:

  • उपपुराणों के अनुसार, गृत्समद ऋषि ने एकाक्षरी मंत्र के जप के पश्चात भगवान गणपति से रुक्मानन्द नामक पुत्र की प्राप्ति की।
  • एक बार शिकार के दौरान एक ऋषि की पत्नी उन पर आसक्त हो गई, परंतु रुक्मानन्द ने उन्हें मना कर दिया।
  • दूसरी ओर, इंद्र ने रुक्मानन्द का रूप धारण कर ऋषि पत्नी को एक पुत्र प्रदान किया। सत्य प्रकट होने पर उस पुत्र का अपमान हुआ।
  • पुत्र ने अपनी माँ को शाप दिया कि वह एक बेर का झाड़ बन जाए, और माँ ने पुत्र को शाप दिया कि उसके घर दैत्य का जन्म हो।
  • लज्जित होकर पुत्र ने श्री गणपति की तपस्या की।
  • श्री गणपति ने उसे त्रिलोकविजयी संतान का वरदान दिया।
  • पुत्र ने श्री गणपति से विनम्र निवेदन किया कि वह उसी स्थान पर स्थापित हो जाएँ, जिसे श्री गणपति जी ने स्वीकार कर लिया।
  • वही स्थान आज श्री वरदविनायक के रूप में प्रतिष्ठित है—ऐसा स्थान जहाँ भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • अन्य अष्टविनायक मंदिरों से भिन्न, यहाँ भक्तों को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है।

📿 दर्शन और सेवा:

  • आज 05.09.2025 शुक्रवार को भी मंदिर पूरे दिन खुला रहेगा।
  • प्रयास करें कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान हैं, थोड़ा समय निकालकर उनके दर्शन का लाभ अवश्य लें।
  • हमारे कुछ परिवारजन प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं, जिसे देखना अत्यंत सुखद होता है।

⏰ आज का कार्यक्रम:

  • प्रथम श्रृंगार एवं आरती: सुबह 08:00 बजे
  • दूसरी आरती और भोग: दोपहर 12:00 बजे
  • तृतीय आरती और विसर्जन: शाम 19:00 बजे

⚠️ विशेष निवेदन:

  • कल श्री गणपति जी की अंतिम आरती होगी। अतः पूरा प्रयास करें कि आरती के समय तक कम से कम एक बार दर्शन अवश्य करें।

आपका मंदिर परिवार 🐘🙏

Program: Day 12 (06.09.2025 Friday) Visarjan Celebrations

  • कल शुक्रवार का दिन अत्यंत आनंददायक रहा।
  • हमारे मंदिर में पाँच गुणी भक्त अपनी पत्नियों के साथ आए और उनके साथ मिलकर हम सभी ने पहली बार वैदिक पद्धति से सामूहिक रूप से २१ श्री गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ किए।
  • किसी जानकार के उच्चारण, सुर, ताल और लय ने वातावरण को दिव्य बना दिया था।
  • पाठ के पश्चात तबला, ढोलक और अन्य वाद्यों के साथ एक से बढ़कर एक सुंदर भजन सुनना अति कर्णप्रिय था। ऐसा लगा जैसे हमारे श्री गणपति महोत्सव में आज माँ सरस्वती का इन लोगों के रूप में आगमन हुआ है।
  • अब तक हम सभी ने 5000 से अधिक श्री गणपति अथर्वशीर्ष श्री एकदंत जी के चरणों में अर्पित कर दिए हैं।
  • एक ओर तो इस बात की गर्वानुभूति हो रही है कि श्री गणपति जी हमारे मंदिर में पधारे, परंतु दूसरी ओर यह सोचकर हृदय व्यथित हो उठता है कि इस गणपति उत्सव के समापन में अब केवल कुछ घंटे ही शेष रह गए हैं।

🌟 आठवें अष्टविनायक: श्री बल्लालेश्वर (पाली):

  • इस गणपति महोत्सव में हमारी बाल वाटिका के बच्चों का बहुत बड़ा योगदान है।
  • ऐसे ही बच्चों के श्री गणपति के प्रेम से जुड़ी हमारे आठवें गणपति की कथा है।
  • यह एकमात्र ऐसे अष्टविनायक हैं जो अपने नहीं, बल्कि अपने भक्त श्री बल्लाल जी के नाम से श्री बल्लालेश्वर के नाम से जाने जाते हैं।
  • पाली गाँव में श्री बल्लाल जी श्री गणेश जी के परम भक्त थे।
  • उन्होंने अपने गाँव में श्री गणपति जी की एक विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों को भी बुलाया।
  • पूजा कई दिनों तक चलने के बावजूद बच्चों ने पूजा समाप्त किए बिना अपने घर वापस जाने से मना कर दिया।
  • क्रोधित बच्चों के माता-पिता ने बल्लाल जी के पिता से कहकर श्री गणपति की प्रतिमा को जंगल में फेंक दिया और उन्हें भी बहुत पीटा।
  • घायल होने के बावजूद बल्लाल जी ने अपनी प्रार्थना बंद नहीं की। बालक बल्लाल की पूजा से प्रसन्न होकर श्री गणपति जी ने अपने दर्शन देकर उन्हें ठीक कर दिया और उनके अनुरोध पर उनके गाँव में ही रहना स्वीकार किया।
  • तभी से यह स्वयंभू मंदिर श्री बल्लालेश्वर कहलाने लगा।
  • इस मंदिर की बनावट बहुत अनोखी है – यहाँ उगते सूर्य की किरणें सीधे श्री गणपति के शरीर पर पड़ती हैं।
  • पाली गाँव में स्थित यह मंदिर पुणे से ११० किमी की दूरी पर है।

📿 दर्शन और सेवा:

  • आज 06.09.2025 शनिवार को मंदिर दोपहर 13:30 बजे तक खुला रहेगा।
  • प्रयास करें कि जब तक श्री गणपति जी विराजमान हैं, थोड़ा समय निकालकर उनके दर्शन का लाभ अवश्य लें।
  • हमारे कुछ परिवारजन प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं, जिसे देखना अत्यंत सुखद होता है।

⏰ आज का कार्यक्रम:

  • अभिषेक, प्रथम श्रृंगार, भोग एवं आरती: सुबह 09:30-10:30 बजे
  • श्री गणपति अथर्वशीर्ष का सामूहिक पाठ: 10:30-12:30 बजे
  • भोग एवं आरती: 12:30-13:30 बजे
  • श्री गणपति विसर्जन: 13:30 बजे

⚠️ विशेष निवेदन:

  • आज श्री गणपति जी की अंतिम आरती होगी। अतः पूरा प्रयास करें कि आरती के समय तक कम से कम एक बार दर्शन अवश्य करें।

आपका मंदिर परिवार 🐘🙏

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