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+++संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता पाठ*+++
*📅 10.10.2026 | शनिवार | 🕓 16:00 बजे*
📍 श्री हिन्दू मंदिर, Giebel Stuttgart

  • श्रीमद्भगवद्गीता को मोक्षदायिनी कहा जाता है। यह ग्रंथ हमारी यात्रा को हमारे शरीर से प्रारम्भ करके, मन से होते हुए, बुद्धि और अहंकार को पार कर श्रीहरि के चरणों तक पहुँचा देता है और मुक्ति का मार्ग दिखाता है। वास्तव में यह ग्रंथ सरल से सरल और गूढ़ से गूढ़ है।
  • इसकी एक और विशेषता है कि यह न केवल जीवित प्राणियों का कल्याण करता है, बल्कि अतृप्त और परेशान आत्माओं को भी शांति प्रदान कर मुक्ति के मार्ग पर ले जाने वाला है।
  • पति-पत्नी, माता-पिता, संतान, भाई-बहन — ये रिश्ते ईश्वरीय होते हैं। एक आत्मा को ईश्वर ने दूसरी आत्मा से अदृश्य तारों द्वारा जोड़ रखा है। जब एक आत्मा को दुःख और क्लेश होता है, तो इन अदृश्य तारों के माध्यम से उसका प्रभाव दूसरों तक भी पहुँचता है — चाहे आत्मा स्थूल शरीर में हो या पितृलोक में।
  • हम अपने एक-दो-तीन-चार पीढ़ियों तक के पूर्वजों को तो जानते हैं, पर उससे पहले के नहीं। अतः यह हमारा परम कर्तव्य है कि हमारे जिन पितरों को अभी तक मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, उनके लिए कुछ करें, जिससे वे भी इस माया के चक्र से बाहर निकल सकें।

– जब तक हमारे पितृ मुक्ति के मार्ग पर नहीं जाएंगे, हमारे जीवन को भी पूर्ण शांति प्राप्त नहीं होगी। श्रीमद्भगवद्गीता ऐसा सद्ग्रंथ है, जिसके पाठ से न केवल हमारा, बल्कि हमारे पूर्वजों का भी कल्याण होता है।

पितृपक्ष का विशेष महत्व

  • वर्ष में पंद्रह दिनों का एक विशेष पक्ष होता है, जब हमारे पितरों का लोक हमारे बहुत निकट माना जाता है। इसीलिए इसे पितृपक्ष कहा जाता है और यह हम सभी के लिए विशेष महत्व रखता है।
  • इस पक्ष में हम जो भी शुभ कर्म करते हैं, उन्हें अपने पितरों को अर्पित कर सकते हैं।
  • हम अपने पितरों की तिथि के अनुसार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, परंतु पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या अत्यंत विशेष होता है।
  • इस दिन हम उन सभी पितरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं, जिनके लिए हम अब तक प्रार्थना नहीं कर पाए या जिनकी तिथि का हमें ज्ञान नहीं है।
    आइए, इस सर्वपितृ अमावस्या पर…
  • हम सभी मंदिर आकर अपने मुख से स्वयं श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें, अपने पितरों को सुनाएँ और उनके कल्याण एवं मुक्ति के लिए परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करें।
  • हमारे इस प्रयास से निश्चय ही ईश्वर और हमारे पूर्वज प्रसन्न होंगे और हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
  • प्रयास करें कि पूर्ण पाठ न सही, कुछ न कुछ पाठ अपने मुख से अवश्य करें और अपने पितरों के कल्याण का प्रयास करें।

न जाने फिर यह मनुष्य देह मिले या न मिले।

🙏 आप सभी का Saturday 10.10.2026 16:00 बजे मंदिर में इंतज़ार रहेगा।

आपका मंदिर परिवार

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