
Shri Ganesh Chaturthi 3.0 Utsav Invitation 2025


श्री गणपति महोत्सव — हमारी परंपरा के पीछे छिपे गूढ़ रहस्य
हमारे जितने भी रीती रिवाज़ और त्यौहार है उन सभी के पीछे कुछ न कुछ गूढ़ बाते होती है. अक्सर हमें उन रहस्यों का ज्ञान न होने से हम उनको कुरीति समझ लेते है. वास्तव में हमारे पूर्वज बड़े ज्ञानी थे जो एक गर्व का विषय है. आइये आने वाले श्री गणपति महोत्सव के विषय में कुछ जाने:
- भगवान श्री गणपति माँ पार्वती और श्री महादेव जी के छोटे पुत्र है. जो ज्ञान, बुद्धि और बल में अग्रणी है. इनकी दो पत्निया रिद्धि और सिद्धि है और इनका वाहन मूषक है.
- प्रयास करे कि आप भी उनके दर्शन कर उनसे सुख समृद्धि, रिद्धि और सिद्धि प्राप्त करे.
- योग की दृष्टि से भी भगवान गणेश का विशेष महत्व है। हठयोग और चक्र-तंत्र की परंपरा में मूलाधार चक्र के अधिष्ठाता देवता भगवान गणेश को माना जाता है। मूलाधार हमारे शरीर की ऊर्जा-व्यवस्था का आधार है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेशजी का स्मरण करने की परंपरा है—अर्थात् पहले अपने जीवन की नींव को मजबूत करना.
- भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद (भादो) महीने के शुक्लपक्ष (बढ़ते चन्द्रमा की कलाओ) की चतुर्थी को केदारनाथ के निकट श्री गौरीकुण्ड नामक स्थान में हुआ था. इसे हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते है. उनके जन्म की कथा से आप लोग संभवतः अवगत होंगे.
- अपनी सूझबूझ, बुद्धि और बल के कारण इनको अपने पिता और समस्त देवी देवताओ से ये आशीर्वाद प्राप्त है की ये देवो में सर्वप्रथम पूजित होंगे, इसीलिए हर पूजा में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा होती है.
- इनको विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि यह अपने भक्तो के विघ्नो का हरण करते है.
- अब प्रश्न यह है की जब जन्म का दिन एक है तो श्री गणपति उत्सव दस दिनों तक क्यों मनाया जाता है. इस विषय में हमको ऋषि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत के प्रथम सर्ग में जानकारी मिलती है. अलग अलग विद्वानों द्वारा बताई बातो में कुछ भिन्नता हो सकती है.
- महाभारत के रचियता ऋषि वेद व्यास जी है पर उसको श्री गणपति जी ने लिखा है. गणपति जी इस शर्त पर इसको लिखने को तैयार हुए कि जब तक व्यास जी बिना रुके बोलते रहेंगे तभी तक गणेश की इसको लिखेंगे. इसको लिखने का कार्य भी गणेश जी के जन्मदिन को शुरू हुआ था और ख़त्म भाद्रपद शुक्लपक्ष चतुर्दशी को हुआ था. जो दस दिन है.
- जब गणपति ने महाभारत लिखने का कार्य पूर्ण करा तो उनका शरीर बहुत गर्म हो गया और उनको शांत करने के लिए उनके ऊपर मिटटी का लेप लगाया और फिर सरस्वती नदी में स्नान के बाद वह मिटटी धुल गई.
- दूसरी कथा यह कहती है कि दस दिनों में गणपति के ऊपर बहुत ही धूल और मिटटी जम गई थी जो चतुर्दशी को स्नान के बाद साफ़ करी गई.
- इसके अलावा, गणपति के दस अवतार माने जाते है, दस दिशाए, दस अक्षर मंत्र ” ॐ गं गणपतये नमः”, गणपति के दस विशेष लक्षण (गुण) होते हैं, जो उनकी विशेषता को दर्शाते हैं.
- यह ही दस दिनों का रहस्य है.
- आज के युग में आदि गुरु शंकराचार्य जी ने गणपति पूजा को पुनर्जीवित करा.
- कालांतर में मराठा काल में छत्रपति शिवजी महाराज ने शक्ति अर्जन के लिए गणपति स्थापना और विसर्जन को आगे बढ़ाया
- बाद में हमारे नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने लोगो को जाग्रत कर इसे घर घर तक पहुंचाया
- श्री गणपति कल सोमवार 14.09.2026 को सायः 18:00-20:00 बजे के बीच हमारे मंदिर में आ रहे है और बारह दिनों तक 25.09.2026 रहेंगे.
आपका मंदिर परिवार
Shri Ganapati Mahotsav 4.0 – Programm guidelines and information
- Shri Ganapati Mahotsav 4.0 will begin on 14.09.2026 (Monday) at 18:00 Hours by doing Shri Ganapati Sthapna (स्थापना) in our Mandir / श्री गणपति महोत्सव 4.0 हमारे मंदिर में सोमवार दिनांक 14.09.2026 को सायः 18:00 बजे श्री गणपति स्थापना के साथ आरम्भ होगा
- Program will conclude on 25.09.2026 (Friday) at around 13:00 Hours by doing Shri Ganapati Visarjan (विसर्जन) / समारोह का समापन शुक्रवार दिनांक 25.09.2026 को मध्यान्ह लगभग 13:00 बजे श्री गणपति विसर्जन के साथ सम्पन्न होगा
- From Sthapna till Visarjan (Twelve Days), our mandir will be open round the clock / स्थापना से विसर्जन तक (दस दिनों) मंदिर लगातार चौबीसो घंटे खुला रहेगा
- You all can come anytime for darshan except the rest/vishram (विश्राम) time of Shri Ganpati ji / भगवान गणपति के विश्राम को छोड़कर, आप लोग कभी भी मंदिर में उनके दर्शनों के लिए आ सकते है
- On Sthapna day a Deepak/Jyoti will be lit and will remain active till Visarjan. All of you have this beautiful opportunity to bring Ghee from your home for Deepak / स्थापना के साथ ही श्री गणपति जी के आगे एक दीपक प्रज्वलित होगा जो विसर्जन तक जलता रहेगा. आप सभी के लिए यह एक अति सूंदर अवसर है कि आप अपने घर से देसी घी लाकर दीपक की ज्योत को निरंतर प्रज्वलित रहने में योगदान करे
- Every day pooja, aarti and bhog will be performed thrice. Morning: 8:00 Hours, Afternoon: 12:00 Hours, Evening 18:30 Hours / प्रतिदिन तीन बार पूजा, भोग और आरती प्रातः: 08:00 बजे, मध्यान 12:00 बजे और संध्या 18:30 बजे की जाएगी.
- All of you can bring and offer Durva Grass, Haldi, Akshat, Kumkum, Pushp(Flowers), Nariyal (Coconut), Jaggery and Fruits for Ganapati ji / आप सभी लोग दूर्वा (दूब), हल्दी, अक्षत, कुमकुम, पुष्प, नारियल, गुड़ और फल श्री गणपति जी को अर्पित कर सकते है
- Since Mandir will be open for all ten days you can also help us by coming early or offer your service in critical timings. We have prepared a chart where you can add your name and become a part of service to Shri Ganapati ji / क्योकि मंदिर लगातार दस दिनों तक खुला रहेगा अतः आप लोग सुबह जल्दी आके, या अन्य माध्यमों से अपनी सेवा अर्पित कर सकते है. हमने एक चार्ट बनाया है जिसमे आप अपने आने का समय अंकित कर सकते है.
- You can stay daytime, evenings, night and early morning’s and do home office from Mandir as well / आपका आगमन दिन में, संध्या को, रात्रि को और ब्रह्म मुहूर्त में हो सकता है और यदि आप चाहे तो HomeOffice भी मंदिर से कर सकते है
- On 20.09.2026 (Sunday), we will be doing special Ganapati celebration after Shri Ramcharitmat Path and Shri Ganapati’s favourite Modak will be offered to him / दिनांक 20.09.2026 रविवार को हम लोग मिलकर विशेष गणपति उत्सव मनाएंगे. जिसमे हम लोग श्री रामचरितमानस पाठ के बाद उनका प्रिय मोदक भी उनको अर्पित करेंगे
- If you are coming from a distance, let us know about your visit, your overnight stay arrangements can be made either in Mandir or in some of family member’s home nearby / यदि आप दूर से आ रहे है तो हमको सूचित करे, आपके सपरिवार रात्रि विश्राम की व्यस्था मंदिर में या आसपास रहने वाले परिवारों के यहाँ की जा सकती है
- If you have small kids and have special requirements, do let us know. We do not promise but will try our level best to make you feel comfortable / यदि आपके साथ छोटे शिशु भी आ रहे है और उनकी कुछ विशेष आवश्यकताए है तो हमको अवगत कराए. हम पूरा प्रयास करेंगे की उनको पूरा कर सके
- It’s a big celebration and a lot of helping hands are required. Come forward and be a part of us and make this special celebration memorable /यह एक बड़ा आयोजन है और इसके लिए बहुत से सहयोगी हाथो की आवश्यकता होगी. आप आगे आए और अपने सहयोग से इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दे
Your Mandir Family
Shri Ganapati Mahotsav 4.0 Program

- यह बहुत ही दुर्लभ होता है की किसी मंदिर में हम ईश्वर के साथ नितांत अकेले, कुछ समय व्यतीत कर सके या उनकी सेवा स्वयं अपने हाथो से कर सके.
- सोचिये हम लोग कितने भाग्यशाली है जो श्री गणपति महोत्सव में ऐसा अवसर एक बार नहीं कई बार आ सकता है, जब सामने बैठे साक्षात् श्री गणपति से अपने ह्रदय के उद्गार व्यक्त कर सके.
- कही ऐसा न हो की जीवन की इस आपाधापी में यह अवसर भी हाथ से निकल जाए.
- जल्द से जल्द हमें सूचित करे की किस वक़्त आप श्री गणपति की सेवा अपने हाथो से करना चाहते है.
- इस बात का हमें पूर्ण विश्वास है की आप जैसे समर्पित परिवार वालो के होते हुए श्री गणपति जी के पास सदैव कोई न कोई सेवा के लिए उपस्थित रहेगा.
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 2 (15.09.2026 Tuesday) Celebrations

🌺 प्रथम दिवस — श्री गणपति जी का आगमन 🌺
- कल 14.09.2026, सोमवार को हमारे श्री गणपति महोत्सव 4.0 का प्रथम दिन था।
- सर्वप्रथम सायः 18:00 बजे, हमारे गुणी शिल्पियों बहन आशा जी और भाई मंजुनाथ जी के निर्देशन में परिवार की बाल वाटिका के बच्चों द्वारा निर्मित श्री विनायक जी के सुंदर विग्रह की मंदिर में विधिवत स्थापना हुई।
- षोडशोपचार विधि से श्री गणपति जी की स्थापना की पूजा लगभग 2 घंटे तक चली। पूजा के दौरान वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि, सौंदर्य और दिव्यता ऐसी थी, जिसे केवल अनुभव ही किया जा सकता था। 🙏
- अब बारह दिनों तक हमारे प्यारे श्री विनायक जी हमारे साथ रहेंगे। पूजा के पश्चात अपने घर आए श्री गणपति जी को श्री गणपति अथर्वशीर्ष सुनाकर आरती और भोग लगाया गया।
- इस पूजा में लगभग 50–60 लोग सम्मिलित हुए। विशेष रूप से छोटे-छोटे बच्चों को पारम्परिक परिधानों में देखना बड़ा ही सुखद और मनमोहक था। 🌺
🌼 आज का कार्यक्रम — मंगलवार 15.09.2026
- आज मंगलवार को मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और तीन बार भगवान का भोग, आरती एवं भजन होगा।
🪔 प्रथम आरती: प्रातः 8:00 बजे
🪔 दूसरी आरती: मध्यान्ह 12:00 बजे
🪔 तृतीय आरती एवं भोग: सायः 18:30 बजे - प्रयास करें कि आप सभी लोग सपरिवार सम्मिलित हों। मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और आप लोग अपनी सुविधा अनुसार कभी भी मंदिर आ सकते हैं।
- यदि कल आप किसी वजह से श्री गणपति जी के दर्शनों के लिए नहीं आ पाए, तो प्रयास करें कि आज उनके दर्शनों के लिए थोड़ा-सा समय अवश्य निकालें। 🙏
🌺 भगवान श्री गणपति जी के जन्म की कथा
- कल भाद्रपद माह की चतुर्थी थी, जो भगवान के जन्म का दिन है और गणेश चतुर्थी के नाम से भी जानी जाती है।
- भगवान श्री गणपति जी के जन्म की कथाएँ पद्म पुराण, लिंग पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, वराह पुराण, शिव पुराण आदि अनेकों पुराणों में आई हैं, जो थोड़ी-थोड़ी भिन्न हैं।
- ऐसा कहा जाता है कि उनका जन्म गौरीकुंड नामक स्थान पर, जो कि केदारनाथ धाम के निकट है, हुआ था। माँ गौरी ने अपनी देह के उबटन से उनका निर्माण किया और उनके अंदर प्राण फूँके। उन्होंने उन्हें अपनी सुरक्षा का आदेश दिया।
- क्योंकि गणेश भगवान को तब तक अपने पिता का ज्ञान नहीं था, इसलिए उन्होंने भगवान महादेव के अंदर जाने का रास्ता रोक लिया।
- बात आगे बढ़ी और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसके अंत में भगवान शिव ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया।
- बाद में माँ गौरी से पूरी बात जानने और माँ के हठ के बाद उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया कि जो भी सबसे प्रथम जीव मिले, उसका धड़ ले आएँ।
- गणों को सबसे पहले एक हाथी दिखाई दिया।
- अतः भगवान नीलकंठ ने हाथी का सिर लगाकर गणेश भगवान को पुनः जीवन प्रदान किया और उन्हें अनेकों-अनेकों आशीर्वाद प्रदान किए। 🙏
🌺 श्री अष्टविनायक विशेष गणपति महोत्सव
- इस बार के हमारे श्री गणपति थोड़ा विशेष है. हमारे श्री गणपति जी के परिवार के साथ हमारी प्यारी बहन पायल ने अपने हाथो से बनाकर सभी अष्टविनायकों को को भी साथ में विराजमान करा है.
- परिवार के लोगो का श्री गणपति के प्रति प्रेम और समर्पण देख ह्रदय बरबस ही प्रफुल्लित हो जाता है
- आने वाले बारह दिनों तक हम आप लोगों से प्रतिदिनअष्टविनायकों की एक कथा साझा करेंगे और प्रयास करेंगे कि हम सब मिलकर भगवान गणपति के विषय में थोड़ा और ज्ञान प्राप्त कर सकें।
- आइए, इन दिनों को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि भगवान श्री गणपति को जानने, समझने और उनके संदेशों को अपने जीवन में उतारने के अवसर के रूप में भी मनाएँ।
आपका,
मंदिर परिवार
श्री गणपति अथर्वशीर्षम: श्री गणपति महोत्सव 4.0 (श्री अष्टविनायक गणपति स्पेशल)
श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं—
करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा॥
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ॥
अर्थात्—मेरी बुद्धि छोटी है, प्रभु का स्वरूप अनंत है। मेरी सामर्थ्य सीमित है, लेकिन मेरे मन का मनोरथ बहुत बड़ा है।
कुछ ऐसी ही स्थिति आज हमारी भी है।
न हमारे पास बहुत बड़ी संख्या है, न कोई विशेष सामर्थ्य। लेकिन इस बार हमारे मन में एक सुंदर मनोरथ है—
🌺 *श्री गणपति महोत्सव 4.0 में हम सभी मिलकर अपने प्यारे श्री गणपति जी के श्री चरणों में अधिक से अधिक श्री गणपति अथर्वशीर्ष अर्पित करें। *🌺
पिछली बार बप्पा की कृपा से हम सभी मिलकर लगभग 11,000 अथर्वशीर्ष पाठ उनके चरणों में अर्पित कर पाए थे। 🙏
इस बार आइए, संख्या की चिंता किए बिना बस अपनी ओर से एक छोटा-सा संकल्प लें।
हमारे मंदिर में श्री गणपति अथर्वशीर्ष की पुस्तिकाएँ उपलब्ध हैं। पूरे गणपति महोत्सव के दौरान जब भी आप मंदिर आएँ, तो प्रयास करें कि कम से कम 5 बार अथर्वशीर्ष का पाठ अवश्य करें और अपनी पाठ-संख्या हमें नोट करवा दें।
यदि आप चाहें तो अपनी ओर से संकल्प ले सकते हैं—
🙏 51 पाठ
🙏 101 पाठ
🙏 108 पाठ
🙏 151 पाठ
या जितना संभव हो उतना।
क्योंकि श्री गणपति जी के लिए संख्या से अधिक महत्वपूर्ण हमारी श्रद्धा और भावना है।
आइए, उनके श्री चरणों में हाथ जोड़कर बस इतना कहें—
“हे गणपति बप्पा!
हमारी शक्ति सीमित है, हमारी बुद्धि सीमित है।
आप ही हमें शक्ति दें, प्रेरणा दें और हमारे इस छोटे से मनोरथ को अपनी कृपा से पूर्ण करवाएँ।”
दीन बंधु दाता भगवान, दिन-दिन बढ़े आपकी शान।
यह दीन भिखारी माँगे दान—अपने चरणों की भक्ति का दान।
हम प्रयास करेंगे…
पर उसे पूर्ण करवाना श्री गणपति जी की कृपा होगी। 🙏
आगे उनकी इच्छा…
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 3 (16.09.2026 Wednesday) Celebrations
- 15.09.2026 का दिन बड़ा ही आनंददायक रहा।**
- रात्रि विश्राम तक लगभग 40 प्रेमी भक्तों ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
- श्री गणपति महोत्सव 4.0: श्री गणपति अथर्वशीर्षम् स्पेशल के अंतर्गत कल हम लोगों ने 200 श्री गणपति अथर्वशीर्षम् उनके श्री चरणों में अर्पित किए
- हमारे स्टुटगार्ट क्षेत्र में जितने हिन्दू रहते हैं, यदि सभी थोड़ा-सा भी सहयोग दें, तो श्री गणपति अथर्वशीर्षम् की यह संख्या बहुत बड़ी हो सकती है।
- यदि आप आज किसी वजह से श्री गणपति जी के दर्शनों के लिए नहीं आ पाए, तो प्रयास करें कि आज उनके दर्शनों के लिए थोड़ा-सा समय अवश्य निकालें।
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🛕 आज 16.09.2026 को भी मंदिर पूरे समय खुला रहेगा। - दिन में तीन बार भगवान की आरती, भोग और भजन होंगे—
🪔 प्रथम आरती — प्रातः 8:00 बजे
🪔 द्वितीय आरती — मध्यान्ह 12:00 बजे
🪔 तृतीय आरती एवं भोग — सायं 19:00 बजे - आप लोग अपनी सुविधा अनुसार मंदिर कभी भी आ सकते हैं।
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🌺 “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया” 🌺 - श्री गणपति का यह अति प्रिय जयघोष तो आप सभी ने कभी न कभी सुना ही होगा।
- आइए, आज इसके विषय में कुछ जानकारी प्राप्त करते हैं।
- “बप्पा” का अर्थ वैश्विक पिता होता है और भगवान गणेश को प्यार से बप्पा भी कहा जाता है।
- सन 1375 ई. में श्री वामन भट्ट और श्रीमती पार्वती बाई के घर एक पुत्र ने जन्म लिया, जिनका नाम मोरया गोसावी रखा गया।
- जो आगे चलकर संत मोरया कहलाए।
- उनके जन्म के विषय में कुछ मतभेद हैं। कुछ लोगों का मत है कि वे कर्नाटक के एक ग्राम से महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गाँव आए और कुछ का कहना है कि वे चिंचवाड़ गाँव में ही जन्मे थे।
- पर यह बात सभी एकमत से स्वीकार करते हैं कि वे एक अनन्य गणपति भक्त थे।
- मोरया जी के श्री गणपति के प्रति अगाध श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का भाव था। वह हर गणेश चतुर्थी को अपने गाँव से लगभग 95 किलोमीटर दूर मयूरेश्वर मंदिर, पुणे में दर्शनों के लिए जाते थे।
- यह सिलसिला उनके बचपन से लेकर 117 वर्ष की आयु तक निर्बाध रूप से चलता रहा।
- वृद्धावस्था के कारण उनके मन में वेदना और पीड़ा थी कि शायद अब वे उनके दर्शनों के लिए नहीं जा पाएँगे।
- ऐसा कैसे हो सकता है कि भक्त तकलीफ में हो और भगवान को उसका भान न हो?
- एक दिन भगवान गणपति जी ने उन्हें दर्शन दिया और कहा कि अब उन्हें उनके दर्शनों के लिए मयूरेश्वर मंदिर जाने की आवश्यकता नहीं है और वे उन्हें वहीं दर्शन देंगे।
- उस दिन जब वे नदी में स्नान करके बाहर निकले, तो उनके हाथ में वही विग्रह था जिसके उन्होंने स्वप्न में दर्शन किए थे।
- भगवान की ऐसी कृपा से उनकी आँखों से अश्रुओं की धारा बह निकली और एक बार फिर भगवान ने दिखा दिया कि वह अपने भक्त के लिए क्या नहीं कर सकते हैं।
- उन्होंने चिंचवाड़ गाँव में श्री गणपति को स्थापित कराया और तभी से भक्त और भगवान का अंतर मिटता चला गया—
🌺 गणपति बप्पा मोरया! 🌺 - भक्त जब उन्हें चरण स्पर्श करके “मोरया” बोलते, तो वह श्री गणपति की कृपा को याद करते हुए “मंगलमूर्ति” कहते, जो कालांतर में—“मंगलमूर्ति मोरया”
बन गया। - ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने चिंचवाड़ गाँव में जीवंत समाधि ली थी।
- श्री गणपति का वह विग्रह और उनका समाधि स्थल आज भी चिंचवाड़ गाँव में है।
🙏 गणपति बप्पा मोरया! – मंगल मूर्ति मोरया! - प्रयास करे की जबतक श्री गणपति हमारे मंदिर में विराजमान है तब तक कम से कम एक बार उनके दर्शनों को अवश्य आए और कुछ श्री गणपति अथर्वशीर्ष उनके चरणों में अर्पित करे
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 4 (17.09.2026 Wednesday) Celebrations
- कल बुधवार, 16.09.2026 का दिन भी ईश्वर की असीम कृपा से अत्यंत आनंदमय रहा। दिन की शुरुआत श्री गणपति जी की सुंदर आरती के साथ हुई।
- कल श्री गणपति जी के विश्राम में जाने तक लगभग 30 प्रेमी भक्तों ने मंदिर आकर उनके दर्शन किए और उनका प्रेम एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
- कल तक हम सभी ने मिलकर 450 श्री गणपति अथर्वशीर्षम्* का पाठ करके उन्हें श्री विनायक जी के श्री चरणों में अर्पित करे
- कल रात्रि में मंदिर में पाँच युवा श्री गणपति प्रेमी रात्रि विश्राम के लिए रुके। सभी भक्तों के जाने के पश्चात उन्होंने अत्यंत भाव और श्रद्धा के साथ भगवान श्री गणपति जी को श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र सुनाया। ऐसे ही छोटे-छोटे भाव और प्रयास हमारी भक्ति को और सुंदर बनाते हैं।
- गणपति महोत्सव वास्तव में एक अत्यंत सुंदर अवसर है, जब हम अपने मन के भाव भगवान के सामने खुलकर रख सकते हैं। हमें सब कुछ कहने की भी आवश्यकता नहीं होती—वह तो हमारे कहे बिना ही हमारे मन की बात जानते हैं और हमें वही प्रदान करते हैं जो हमारे लिए उचित है।
- आप भी प्रयास करें कि प्रतिदिन थोड़े समय के लिए मंदिर आएँ, श्री गणपति जी के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही, अपनी सुविधा के अनुसार कुछ श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ स्वयं करके उसे उनके श्री चरणों में अर्पित करें।
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🌺 आज गुरुवार, 17.09.2026 का कार्यक्रम 🌺 - 🛕 आज भी मंदिर पूरे दिन भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा।
🪔 प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे
🪔 द्वितीय आरती एवं भोग: दोपहर 12:00 बजे
🕉️ सामूहिक श्री गणपति अथर्वशीर्षम् पाठ:*सायं *18:00–19:00 बजे*
🪔 तृतीय आरती एवं भोग: सायं 19:00 बजे - सायं 18:00 से 19:00 बजे तक हम सभी मिलकर श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का सामूहिक पाठ करेंगे और अपने प्रिय गणपति बप्पा के मंदिर को मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान करेंगे।
- दोपहर 13:00 से 16:00 बजे तक भगवान के विश्राम का समय रहेगा, अतः इस अवधि में दर्शन नहीं होंगे।
- आप अपनी सुविधा के अनुसार दिन में किसी भी समय मंदिर आ सकते हैं। प्रयास करें कि जब तक श्री गणपति जी हमारे मंदिर में विराजमान हैं, तब तक प्रतिदिन थोड़े समय के लिए ही सही, उनके दर्शनों का लाभ अवश्य लें।
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🌸 वेदों से पुराणों तक — ज्ञान की गंगा 🌸 - वेदों में निहित ज्ञान की गंगा को उपनिषदों ने आगे बढ़ाया, लेकिन उपनिषदों का गहन आध्यात्मिक ज्ञान सामान्य जनमानस के लिए अत्यंत गूढ़ और कठिन था।
- इसलिए परंपरा के अनुसार महर्षि वेदव्यास जी ने इसी ज्ञान को सरल और रोचक बनाने के लिए विभिन्न पुराणों की कथाओं के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाया।
- बाद में इसी परंपरा से 18 उपपुराणों का भी विकास हुआ और ईश्वरीय ज्ञान की यह गंगा और अधिक विस्तृत होती गई।
- भगवान गणपति जी के विषय में वेदों की अनेक ऋचाओं तथा पुराणों में वर्णन मिलता है। लेकिन भगवान गणेश से संबंधित विस्तृत कथाएँ मुख्य रूप से गणेश उपपुराण और मुद्गल उपपुराण में मिलती हैं।
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🌺 श्री अष्टविनायक तीर्थ यात्रा 🌺 - वर्तमान महाराष्ट्र क्षेत्र पर श्री गणपति जी की विशेष कृपा मानी जाती है। वहाँ आठ ऐसे प्राचीन गणपति मंदिर हैं जिन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन स्थानों को स्वयंभू गणपति से भी जोड़ा जाता है—अर्थात् ऐसी मान्यता कि इन स्थानों पर भगवान गणपति स्वयं प्रकट हुए।
- इन आठों पवित्र मंदिरों की यात्रा को श्री अष्टविनायक तीर्थ यात्रा कहा जाता है।
- इस बार हमारे मंदिर में भी सभी अष्टविनायक विराजमान हैं।
- आने वाले आठ दिनों में हम आपको एक-एक करके इन सभी अष्टविनायकों से परिचित करवाएँगे और उनकी कथाओं के माध्यम से आपको अष्टविनायक तीर्थ यात्रा पर ले चलेंगे।
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🌺 प्रथम अष्टविनायक — श्री मयूरेश्वर विनायक🌺 - अष्टविनायक यात्रा का प्रथम पड़ाव है श्री मयूरेश्वर विनायक मंदिर, जो पुणे के निकट मोरेगाँव में स्थित है।
- यह वही पवित्र स्थान है जहाँ श्री मोरया जी की भगवान गणपति के प्रति अगाध श्रद्धा थी। वे लगभग 95 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर भगवान गणपति के दर्शन करने आया करते थे। उनकी प्रेरणादायक कथा हमने आपको कल ही सुनाई थी।
- ऐसी भी मान्यता है कि प्रसिद्ध गणपति आरती “सुखकर्ता दुखहर्ता” की प्रेरणा श्री समर्थ रामदास स्वामी जी को इसी पवित्र मंदिर में प्राप्त हुई थी।
- प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में सिंधुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से देवताओं और जनमानस की रक्षा करने के लिए भगवान गणपति ने मोर पर आरूढ़ होकर उसका वध किया। इसी कारण इस स्थान पर भगवान गणपति को मयूरेश्वर नाम से जाना गया।
- इस मंदिर में श्री मयूरेश्वर जी के साथ माता रिद्धि और सिद्धि के विग्रह भी विराजमान हैं। मंदिर के द्वार पर श्री नंदी जी और मूषक जी भी विराजमान हैं।
- यहाँ श्री गणपति जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई है। गणपति उपासना की लोक-मान्यताओं में ऐसी प्रतिमा को गृहस्थ जीवन, सुख-समृद्धि, उन्नति, परिवार और मंगलकारी कार्यों से जोड़ा जाता है।
- आइए, इस गणपति महोत्सव में हम केवल उत्सव न मनाएँ, बल्कि भगवान गणपति की कथाओं, प्रतीकों और उनके पीछे छिपे आध्यात्मिक संदेशों को भी समझें।
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 5 (18.09.2026 Friday) Celebrations
- कल बृहस्पतिवार, 17.09.2026 का दिन भी ईश्वर की असीम कृपा से अत्यंत आनंदमय रहा।
- प्रातःकाल स्नान आदि करके भगवान के दरबार में आने वाले कुछ प्रेमी भक्तों को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने अपने हाथों से श्री गणपति जी की सेवा की। भगवान की सेवा का यह अवसर अपने आप में कितना सौभाग्यपूर्ण है, इसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
- थोड़ा कठिन अवश्य होता है, पर प्रयास करें कि कभी-कभी आप भी प्रातःकाल की इस स्वर्णिम बेला में श्री विनायक जी के समक्ष उपस्थित होकर उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के साक्षी बनें। सुबह के शांत वातावरण में भगवान के सम्मुख कुछ क्षण बिताने का अपना ही आनंद है।
- कल का दिन विशेष रूप से हमारी माताओं और बहनों की सेवा एवं भक्तिभाव को समर्पित रहा। वे पूरे दिन श्री गणपति जी की सेवा में उपस्थित रहीं और भोजन-प्रसाद की व्यवस्था के साथ-साथ पूजा-पाठ में भी प्रेमपूर्वक सहभागी बनी रहीं।
- उन्होंने अत्यंत प्रेम और श्रद्धा से श्री गणपति जी के लिए भोग तैयार किया। उनके इस निःस्वार्थ सेवाभाव और भक्तिभाव को हमारा बारम्बार प्रणाम।
- श्री गणपति जी के विश्राम में जाने तक लगभग 40 प्रेमी भक्तों ने उनके दर्शन किए तथा उनका प्रेम, आशीर्वाद और प्रसाद प्राप्त किया।
- कल शायद आप सभी की व्यस्तता कुछ अधिक रही, इसलिए अपेक्षाकृत कम भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आ सके। फिर भी हम सभी ने मिलकर 700 श्री गणपति अथर्वशीर्षम् के पाठ भगवान के श्री चरणों में अर्पित किए। यह भी उनकी ही कृपा है।
- कल रात्रि में सभी लोगो ने मिलकर भगवान को श्री रामरक्षास्त्रोत सुनाया
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🌸आज शुक्रवार, 18.09.2026 का कार्यक्रम🌸 - आज भी मंदिर पूरे समय खुला रहेगा और दिन में तीन बार भगवान की आरती एवं भोग लगाया जाएगा।
🪔️ प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे
🪔️ द्वितीय आरती एवं भोग: दोपहर 12:00 बजे
🪔️ सामूहिक वैदिक श्री गणपति अथर्वशीर्षम् पाठ: सायं 20:00–21:00 बजे
🪔 तृतीय आरती एवं भोग: सायं 19:00 बजे - आज सायं 20:00 से 21:00 बजे तक हमारे कुछ वेदपाठी एवं ज्ञानी सदस्य मंदिर में उपस्थित होंगे और सामूहिक रूप से वैदिक पद्धति से 21 बार श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ करेंगे।
- *एक घंटे तक मंत्रों की पवित्र ध्वनि से मंदिर का वातावरण गुंजायमान होगा। प्रयास करें कि इस सुंदर और आनंदमय अवसर से आप वंचित न रहें। *
🕐 दोपहर 13:00 से 16:00 बजे तक भगवान के विश्राम का समय रहेगा। अतः इस अवधि में दर्शन नहीं होंगे। - जब तक श्री गणपति जी हमारे मंदिर में विराजमान हैं, प्रयास करें कि प्रतिदिन थोड़ा समय निकालकर उनके दर्शन अवश्य करें। हमारे कुछ परिवार ऐसे भी हैं जो प्रतिदिन भगवान के दर्शन के लिए आते हैं—उन्हें नियमित रूप से भगवान की सेवा में आते देखना वास्तव में बहुत सुखद अनुभव है।
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🌺अष्टविनायक — आठ ही क्यों?🌺 - जब हम अष्टविनायक की बात करते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि ये आठ ही क्यों हैं?
- योग और आध्यात्मिक परंपराओं में इसकी विभिन्न व्याख्याएँ मिलती हैं। एक मत के अनुसार अष्टविनायक हमारे आठ यौगिक चक्रों का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दृष्टि से अष्टविनायक की यात्रा केवल आठ मंदिरों की यात्रा नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा का भी एक सुंदर प्रतीक बन जाती है।
- भगवान गणपति के स्वरूप में भी हमें जीवन के लिए अनेक सुंदर संदेश मिलते हैं।
🐘 हाथी का मस्तक हमें बताता है कि बुद्धि विशाल होने के साथ-साथ स्थिर और विवेकपूर्ण होनी चाहिए।
👂 बड़े कान और छोटा मुँह हमें संदेश देते हैं कि अधिक सुनें और कम बोलें।
🐀 मूषक हमारे चंचल मन का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार मूषक इधर-उधर दौड़ता रहता है, उसी प्रकार हमारा मन भी निरंतर भटकता रहता है। उसे स्थिर बुद्धि और विवेक के द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है। - और जब मन शांत होता है, तभी चिंता का नाश होता है। शायद इसी कारण अष्टविनायक यात्रा में हमें अपने भीतर झाँकने और अपने मन को समझने का भी अवसर मिलता है।
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🌺द्वितीय अष्टविनायक🌺
श्री चिंतामणि गणपति — थेऊर - अष्टविनायक यात्रा के दूसरे पड़ाव पर हम पहुँचते हैं थेऊर के श्री चिंतामणि गणपति के पास।
- ऐसी मान्यता है कि ब्रह्माजी ने अपने मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर श्री गणपति जी की आराधना की थी। श्री चिंतामणि गणपति से जुड़ी कथा का वर्णन मुद्गल उपपुराण में भी मिलता है।
- प्रचलित कथा के अनुसार राजा अभिजीत और उनकी रानी गुणवती के पुत्र कण का स्वभाव अत्यंत दुष्ट था। उसे संतों और ऋषि-मुनियों को परेशान करने में आनंद आता था।
- एक दिन शिकार करते-करते वह कपिल मुनि के आश्रम में पहुँचा। कपिल मुनि के पास एक दिव्य चिंतामणि मणि थी, जिसके बारे में मान्यता थी कि वह मन की इच्छित वस्तु प्रदान कर सकती थी।
- कपिल मुनि ने उसी चिंतामणि की सहायता से राजकुमार कण का भव्य आतिथ्य किया। राजकुमार उस मणि से अत्यंत प्रभावित हुआ और उसे अपने साथ ले जाने की जिद करने लगा।
- कपिल मुनि के मना करने पर कण ने बलपूर्वक वह चिंतामणि उनसे छीन ली।
- जब उसके माता-पिता को इस बात का पता चला तो उन्होंने उसे मणि वापस करने के लिए कहा, लेकिन उसने उनकी बात नहीं मानी।
- तब कपिल मुनि ने भगवान श्री गणपति से प्रार्थना की। भगवान गणपति ने कण के साथ युद्ध किया और उसे परास्त कर दिया।
- राजा अभिजीत ने कपिल मुनि से क्षमा माँगी और चिंतामणि उन्हें वापस कर दी। लेकिन कपिल मुनि ने उस दिव्य मणि को अपने पास रखने के बजाय श्री गणपति जी को ही अर्पित कर दिया।
- तभी से इस स्थान पर भगवान गणपति “चिंतामणि गणपति” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
🌺 चिंतामणि गणपति हमें एक सुंदर संदेश देते हैं— - बाहरी वस्तुएँ हमारी इच्छाओं को पूरा कर सकती हैं, लेकिन मन की वास्तविक शांति केवल भीतर के गणपति को जागृत करने से प्राप्त होती है।
- आइए, इस गणपति महोत्सव में हम केवल भगवान के दर्शन ही न करें, बल्कि उनके स्वरूप, कथाओं और प्रतीकों में छिपे जीवन के संदेशों को भी समझने का प्रयास करें।
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 6 (19.09.2026 Saturday) Celebrations
कल शुक्रवार, 18.09.2026 का दिन भी ईश्वर की असीम कृपा से अत्यंत आनंदमय रहा।
- थोड़ा कठिन अवश्य होता है, पर प्रयास करें कि कभी-कभी आप भी प्रातःकाल की इस स्वर्णिम बेला में श्री विनायक जी के समक्ष उपस्थित होकर उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के साक्षी बनें। सुबह के शांत वातावरण में भगवान के सम्मुख कुछ क्षण बिताने का अपना ही आनंद है।
- कल का दिन विशेष रूप से हमारी माताओं और बहनों की सेवा एवं भक्तिभाव को समर्पित रहा। वे पूरे दिन श्री गणपति जी की सेवा में उपस्थित रहीं और भोजन-प्रसाद की व्यवस्था के साथ-साथ पूजा-पाठ में भी प्रेमपूर्वक सहभागी बनी रहीं।
- श्री गणपति जी के विश्राम में जाने तक लगभग 40 प्रेमी भक्तों ने उनके दर्शन किए तथा उनका प्रेम, आशीर्वाद और प्रसाद प्राप्त किया।
- कल शायद आप सभी की व्यस्तता कुछ अधिक रही, इसलिए अपेक्षाकृत कम भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आ सके। फिर भी हम सभी ने मिलकर अब तक 950 श्री गणपति अथर्वशीर्षम् के पाठ भगवान के श्री चरणों में अर्पित किए। यह भी उनकी ही कृपा है।
- कल सायः 20:00 से 21:00 बजे तक हमारे कुछ वेदपाठी एवं ज्ञानी सदस्य मंदिर में उपस्थित हुए और सामूहिक रूप से वैदिक पद्धति से 21 बार श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ करा.
- फिर रात्रि में सभी लोगो ने मिलकर भगवान को श्री रामरक्षास्त्रोत भी सुनाया
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📿 दैनिक कार्यक्रम:
🪔️ प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे
🪔️ द्वितीय आरती एवं भोग: मध्यान्ह 12:00 बजे
🪔️ तृतीय आरती एवं भोग: संध्याकाल 19:00 बजे - भगवान का विश्राम काल: दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक (इस दौरान दर्शन बंद रहते हैं)
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💫 अष्टविनायक: तृतीय सिद्धिस्थान – श्री सिद्धिविनायक (सिद्धटेक) - एक कवि ने लिखा है: “हमारे इस संसार में आने के साथ ही जाने की तैयारी शुरू हो जाती है।” श्री गणपति जी के विसर्जन का समय निकट आ रहा है और उनके साथ बिताने के लिए अब थोड़ा ही समय शेष है।
- बिना ईश्वर के चरणों में समर्पण के, जीवन के मार्ग की कठिनाइयों का अंत करना कठिन है। विशेष परिस्थितियों में हमें उनके आशीर्वाद और सिद्धियों की आवश्यकता होती है।
- ऐसी ही सिद्धियों का एक प्रमुख स्थान है – तृतीय अष्टविनायक: सिद्धटेक के श्री सिद्धिविनायक मंदिर (अहमदनगर जिला, महाराष्ट्र)।
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📖 पौराणिक कथा: - मुद्गल उपपुराण के अनुसार, भगवान विष्णु की योगनिद्रा से उत्पन्न दो राक्षस मधु और कैटभ ने ब्रह्मा जी की सृष्टि में बाधा डालनी शुरू की।
- माँ दुर्गा के वरदान के कारण भगवान विष्णु भी उन्हें पराजित नहीं कर पा रहे थे।
- भगवान शंकर के निर्देश पर, विष्णु जी ने श्री गणपति के आशीर्वाद से इन राक्षसों का वध किया।
- जिस स्थान पर विष्णु जी को यह आशीर्वाद और अनेक सिद्धियाँ प्राप्त हुईं, वह श्री सिद्धिविनायक सिद्धटेक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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🔮 मंदिर की विशेषताएँ: - इस मंदिर में श्री गणपति जी की सूँड दाईं ओर है, जो इसे एक सिद्ध स्थान बनाती है।
- यहाँ श्री गणपति को प्रसन्न करना कठिन माना जाता है, किंतु एक बार प्रसन्न होने पर वे भक्तों को अनेक सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।
- इस मंदिर में श्री गणपति जी की गोद में रिद्धि और सिद्धि भी विराजमान हैं।
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⚠️ ध्यान देने योग्य: - मुंबई का प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर इससे भिन्न है और अष्टविनायक में शामिल नहीं है।
- श्री गणपति आप सभी को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करें! 🐘
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 7 (20.09.2026 Sunday) Celebrations
🙏 आइये हम सभी मिलकर प्रयास करें कि हमारे घर आए श्री गणपति को एक क्षण भी अकेला न छोड़े।
✨ कल (शनिवार 19.09.2026) की झलकियाँ
- दिन भर मंदिर का वातावरण आनंदमय और उत्साहवर्धक रहा।
- प्रातःकाल की स्वर्णिम बेला में अनेक भक्तों ने श्री विनायक जी के दिव्य श्रृंगार के दर्शन किए।
- कई भाई-बहनों ने दिनभर सेवा की और प्रसाद की तैयारियों में योगदान दिया।
- मंदिर की दिव्य आलोकित आभा से हर आगंतुक मंत्रमुग्ध हुआ, मानो विवाह-उत्सव का घर हो।
- ताएँ एवं बहनें अन्नपूर्णा बनकर भगवान और भक्तों के लिए भोजन तैयार करती रहीं।
- सुबह से ही भक्तजन सेवा-भाव से उपस्थित रहे।
- रात्रि विश्राम तक लगभग 50 भक्तों ने दर्शन और सेवा का लाभ लिया।
- अब तक लगभग 1100 से अधिक बार श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ हो चुका है।
- कई भक्त चुपचाप आकर पाठ करके अपना नाम लिखकर चले गए, जिससे पूरे दिन श्री गणपति का नाम मंदिर में गूंजता रहा।
- सामूहिक पाठ के समय वातावरण इतना आनंदमय होता है कि सभी बार-बार पाठ करने की इच्छा करते हैं।
- फिर रात्रि में सभी लोगो ने मिलकर भगवान को श्री रामरक्षास्त्रोत भी सुनाया
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📿 दैनिक कार्यक्रम:
🪔️ प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे - 11:00 बजे से मंदिर में श्रीरामचरितमानस पाठ और उसके पश्चात भजन एवं आरती होगी
- आज साप्ताहिक मासपारायण में रावण वध का प्रसंग है
🪔️ द्वितीय आरती एवं भोग: मध्यान्ह 12:00 बजे
🪔️ तृतीय आरती एवं भोग: संध्याकाल 19:00 बजे - भगवान का विश्राम काल: दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक (इस दौरान दर्शन बंद रहते हैं)
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📖 अष्टविनायक: चतुर्थ सिद्धिस्थान: रांजणगाँव महागणपति - त्रिपुरासुर, ऋषि गृत्समद का पुत्र था, जिसने श्री गणपति की आराधना कर तीन पुर (स्वर्ण, रजत, लौह) प्राप्त किए और अपराजेय शक्ति पाई।
- अहंकारवश उसने तीनों लोकों पर साम्राज्य कर लिया।
- देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उससे युद्ध किया, पर विजय न मिल सकी।
- कारण यह था कि शिवजी ने पहले श्री गणपति का आशीर्वाद नहीं लिया था।
- गणपति की आराधना कर आशीर्वाद पाकर शिवजी ने त्रिपुरासुर का वध किया।
- यही स्थान आज रांजणगाँव है और यहाँ के गणपति “महागणपति” कहलाते हैं।
- विशेषता: मंदिर ऐसा निर्मित है कि सूर्य की पहली किरण सीधे श्री गणपति के चरणों का स्पर्श करती है।
आपका मंदिर परिवार
Program: Day 8 (21.09.2026 Monday) Celebrations
🙏 आइये हम सभी मिलकर प्रयास करें कि हमारे घर आए श्री गणपति जी को एक क्षण भी अकेला न छोड़े।
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✨*श्री गणपति कृपा *
कल के दिन की एक घटना अत्यंत सुखद रही. हमारे मंदिर के एक छोटे से बालक युवान ने ऐसा निश्चय करा कि श्री गणपति जी के विसर्जन तक वह 101 श्री गणपति अथर्वशीर्षम उनके चरणों में अर्पित करेगा। मंदिर के एक छोटे से बच्चे का ऐसा वचन हम सब के लिए कितना प्रेरणादायक है. धन्य है उसके माता पिता जिन्होंने उसको ऐसे सुंदर संस्कार दिए है. हम सब भी स्वयं से यह प्रश्न करे कि हम श्री गणपति जी को विसर्जन तक क्या अर्पित करेंगे।
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✨ कल (रविवार 20.09.2026) की झलकियाँ
- दिन भर मंदिर का वातावरण आनंदमय और उत्साहवर्धक रहा।
- हमारी बहने सुबह 6 बजे मंदिर आ गई और श्री गणपति के लिए मोदक तैयार करने में लग गई
- मंदिर की दिव्य आलोकित आभा से हर आगंतुक मंत्रमुग्ध हुआ, मानो विवाह-उत्सव का घर हो।
- सुबह से ही भक्तजन सेवा-भाव से उपस्थित रहे।
- रात्रि विश्राम तक लगभग 180 भक्तों ने दर्शन और सेवा का लाभ लिया।
- अब तक लगभग 1450 से अधिक बार श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ हो चुका है।
- कई भक्त चुपचाप आकर पाठ करके अपना नाम लिखकर चले गए, जिससे पूरे दिन श्री गणपति का नाम मंदिर में गूंजता रहा।
- सामूहिक पाठ के समय वातावरण इतना आनंदमय होता है कि सभी बार-बार पाठ करने की इच्छा करते हैं।
- फिर रात्रि में सभी लोगो ने मिलकर भगवान को श्री रामरक्षास्त्रोत भी सुनाया
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📿 दैनिक कार्यक्रम:
🪔️ प्रथम श्रृंगार एवं आरती: प्रातः 08:00 बजे
🪔️ द्वितीय आरती एवं भोग: मध्यान्ह 12:00 बजे
🕉️ सामूहिक श्री गणपति अथर्वशीर्षम् पाठ:*सायं *18:00–19:00 बजे*
🪔️ तृतीय आरती एवं भोग: संध्याकाल 19:00 बजे
भगवान का विश्राम काल: दोपहर 13:00 बजे से 16:00 बजे तक (इस दौरान दर्शन बंद रहते हैं)
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📖 अष्टविनायक: पाँचवें सिद्धिस्थान: श्री विघ्नहर्ता (ओझर): - हम जैसे बुद्धिहीन और नासमझ लोगों के प्रयासों को भी भगवान गणपति निर्विग्न बना रहे हैं।
- शायद इसीलिए गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो कि हमारे पाँचवें अष्टविनायक गणपति हैं।
- स्कन्द पुराण और मुद्गल उपपुराण में विघ्नहर्ता से जुड़ी कथा आती है।
📖 कथा: - राजा अभिनन्दन ने तीनों लोकों के स्वामी बनने की इच्छा से एक यज्ञ आरंभ किया। देवराज इंद्र इससे भयभीत हो गए और उन्होंने विघ्नासुर नामक एक असुर उत्पन्न किया।
- विघ्नासुर ने केवल राजा अभिनन्दन के यज्ञ को नष्ट करने के बजाय सभी यज्ञों को विघ्नित करना शुरू कर दिया।
- विघ्नासुर के अत्याचारों से पीड़ित ऋषि-मुनियों ने श्री गणपति से अपनी रक्षा की प्रार्थना की। श्री गणपति जी ने विघ्नासुर को परास्त किया और इस शर्त पर छोड़ा कि जहाँ कहीं भी श्री गणपति का पूजन होगा, वहाँ वह नहीं आएगा।
- विघ्नासुर ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए श्री गणपति से अनुरोध किया कि भक्त श्री गणपति के नाम से पहले उसका नाम लें।
- तभी से श्री गणपति को विघ्नहर भी कहा जाता है, और जिस स्थान पर विघ्नहर्ता निवास करने लगे, वह स्थान अष्टविनायक मंदिरों में से एक ओझर का विघ्नहर मंदिर कहलाने लगा।
आपका मंदिर परिवार
श्री गणपति अथर्वशीर्ष सामूहिक पाठ निमंत्रण
जैसे-जैसे श्री गणपति विसर्जन का दिन निकट आ रहा है, हृदय अंदर ही अंदर विह्वल हो रहा है।
अब हमारे प्यारे श्री विनायक जी के विसर्जन में मात्र दो दिन शेष हैं।
मन बार-बार यही सोचता है—
क्या पाएँ, क्या करें अपने प्यारे श्री गणपति जी के लिए, जिससे वे केवल हमारे मंदिर में ही नहीं, बल्कि सदैव हमारे हृदय-मंदिर में विराजमान रहें।
श्री गणपति जी को रिझाने और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए हम कल एक छोटा-सा प्रयास करने जा रहे हैं।
कल, *24.09.2026, बृहस्पतिवार को सायः 19:00 बजे *, हमारे मंदिर परिवार के कुछ वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ मिलकर वैदिक पद्धति से हम अपने श्री विनायक जी को 21 बार श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ सुनाएँगे।
ऐसा विचार है कि इस पावन सामूहिक पाठ में कम से कम 51 प्रेमी मिलकर और एक साथ बैठकर श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ करें।
यह केवल एक पाठ नहीं, बल्कि हमारे प्रिय श्री गणपति जी के चरणों में हम सबकी सामूहिक श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता की छोटी-सी भेंट होगी। 🙏🌺
क्या आप कल अपने व्यस्त समय में से थोड़ा-सा समय निकालकर मंदिर आएँगे?
आइए, विसर्जन से पहले एक बार फिर अपने श्री विनायक जी के साथ प्रेम और भक्ति से बैठें, उनका नाम लें और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।
आइए… मिलकर श्री गणपति अथर्वशीर्षम् का पाठ करें।
आइए… अपने मन-मंदिर में श्री गणपति जी को सदैव के लिए विराजमान करें। 🙏
आपका अपना,
मंदिर परिवार 🌺🙏
Visarjan
हमारे प्यारे बप्पा का विसर्जन इस आने वाले शुक्रवार, 25 सितंबर, 2026 (भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी – अनंत चतुर्दशी) को होना है।
लेकिन बप्पा की प्राण-प्रतिष्ठा या विसर्जन करने वाले हम कौन होते हैं?
जैसा कि मराठी लेखक और वक्ता सारंग भोइरकर ने बहुत सही कहा है: “हम भला उन्हें कैसे स्थापित या विसर्जित कर सकते हैं जो स्वयं समय के स्वामी हैं—वह समय जो अनादि, अनंत और असीम है? श्री गणेश और महादेव ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के प्रतीक हैं। विसर्जन तो इंसानों का होता है… सिद्धांत तो शाश्वत होते हैं।”
फिर भी, बप्पा हर साल गणेश चतुर्थी पर आते हैं और अनंत चतुर्दशी पर विदा लेते हैं।
दसवें दिन होने वाला विसर्जन इस बात की याद दिलाता है कि भौतिक जीवन क्षणभंगुर है और प्रकृति में मौजूद रूप अंततः अपने मूल तत्वों में विलीन हो जाते हैं।
मिट्टी की मूर्ति में जाग्रत दैवीय ऊर्जा की तीव्रता इस अवधि (गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक) के दौरान अपने चरम पर होती है; आप में से कुछ लोगों ने मंदिर में इस दैवीय ऊर्जा का अनुभव किया होगा, जहाँ गणेश चतुर्थी से बप्पा विराजमान हैं।
परंपरा के अनुसार, हम अब अगले साल तक गणपति बप्पा को विदाई दे रहे हैं। गणेशोत्सव के पूरे त्योहार के दौरान, भक्त एक पल के लिए भी गणपति बप्पा से दूर नहीं हुए; आज भी, पाँच युवा भक्त मंदिर में मौजूद हैं और अथर्वशीर्ष व विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहे हैं।
आखरी दो दिनों में मंदिर में गणेश अभिषेक और अथर्वशीर्ष का पाठ बिना रुके, जितना संभव हो सके, जारी रहेगा।
कल रात गणपति बप्पा के सानिध्य में समय बिताने और मंदिर की दिव्य ऊर्जा का लाभ उठाने का आखिरी मौका होगा। आइए, हम सब मिलकर गणपति बप्पा की उपस्थिति से मिलने वाली दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करें।
अंतिम पूजा, उत्तर पूजा और विसर्जन शोभायात्रा (प्रतीकात्मक) शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे के बीच होगी।
गणपति बप्पा मोरया।
हिंदू मंदिर: गीबेल स्टुटगार्ट
Vedisches Kulturzentrum Stuttgart e. V.
Kreuzotterweg 2, 70499