
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
ईशावास्योपनिषद्स में आया यह श्लोक हमको बताता है की सृष्टि में सब कुछ ईश्वर से व्याप्त है. हमारे ग्रंथो और सभी संतो ने भी इस बात की पुष्टि करी है, कि ईश्वर हर जगह व्याप्त है पर हम सब अपने अज्ञान के कारण कभी कभी उसको देख नहीं पाते है. परमात्मा अत्यंत दयालु है जो हमको अनेको तरीको से बताते है की हम सभी जगह व्याप्त है और अपनी चैतन्यता का अनुभव कराते है.
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि एक कल्प में चार युग होते है. आप लोगो ने कलयुग में चार धाम यात्रा के विषय में भी सुना होगा. ऐसा बताते है कि हमारे यह चारो धाम चारो युगो को पार कराके हमको मुक्ति के द्वार तक ले जाते है. सतयुग के लिए श्री बद्रीनाथ धाम, द्वापरयुग के लिए श्री द्वारका धाम, त्रेतायुग के लिए श्री रामेश्वर धाम और कलयुग के लिए श्री जगन्नाथ धाम बताए जाते है. कलयुग के अंत में भी इस धाम का अति महत्वपूर्ण योगदान होगा, ऐसा पुराणों में वर्णित है.
श्री जगन्नाथ धाम पुरी को एक जागृत धाम भी कहा जाता है जहाँ आज भी भगवान श्री कृष्ण का जीवित ह्रदय धड़कता है. ऐसे शक्तिशाली जागृत धाम का एक प्रमुख पर्व उसकी रथयात्रा होती है जिसमे भगवान श्री जगन्नाथ जी, भाई श्री बलराम जी और उनकी बहन माँ सुभद्रा जी को उनके विशेष रथों में सजा कर यात्रा निकाली जाती है. यह यात्रा अत्यंत ही अद्भुत, आनंददायक और मोक्षप्रदाता होती है.
पिछले वर्ष हम लोगो ने अपने मंदिर में इस यात्रा को एक छोटे से रूप में प्रारम्भ करा था. उसी श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए हम लोग अगले रविवार (29.06.2025 Sunday) को अपने मंदिर में यह यात्रा आयोजित करेंगे. उस दिन हम लोग भगवान को उड़िया प्रसाद भी अर्पित करेंगे। आप सभी हमारे मंदिर परिवार बड़े प्यारे सदस्य है. आइए मिलकर इस रथयात्रा को अपनी करसेवा से जीवंत व अविस्मरणीय बना दे.
हमारा यह रथ कई अर्थो में विशेष होगा क्योकि इसको हमारे मंदिर परिवार के छोटे छोटे बाल पुष्प सजा कर उसमे अपने भाव और प्रेम के रंग भरेंगे. इतने प्यारे बच्चो के हाथो से तैयार रथ पर भला भगवान जगन्नाथ जी स्वयं क्यों नहीं विराजमान होंगे। वह दयानिधान तो माँ कर्माबाई की खिचड़ी खाने चले आए तो अवश्य ही हम लोगो की भी पुकार पर आएंगे ऐसा हमारा विश्वास है.
इस यात्रा के दिन हमारे अतिप्रिय भ्राता सिबाशीष जी हम सबको इस यात्रा, श्री जगन्नाथ धाम, और उससे जुडी कथा और अनेको आश्चर्यजनक और विलक्षण तथ्यो के विषय में विस्तार से बताएँगे. उनकी पूरी बात सुनकर निश्चय ही आप सभी स्वयं को हिंदू होने पर गौरवान्वित महसूस करेंगे और अपनी समृद्ध परंपरा पर गर्व करेंगे।
आप सपरिवार इस यात्रा के लिए अपने पारम्परिक वस्त्रो का चुनाव कर तैयार कर ले. आप सभी को सपरिवार इसमें सम्मिलित होना है. आपके सुदृण कंधे और मजबूत हाथ हमारे रथ को संबल प्रदान करेंगे।
रथयात्रा के कार्यक्रम की रूपरेखा जल्द ही आपसे साँझा करेंगे।
आपका मंदिर परिवार